तकनीकी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार तलब, रुड़की हत्याकांड में दो आरोपियों की जमानत भी खारिज
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दो अहम मामलों में सख्त रुख अपनाया। एक ओर तकनीकी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में संविदा कर्मचारियों को हटाए जाने के मामले में कोर्ट ने आदेशों की अवहेलना पर नाराजगी जताते हुए रजिस्ट्रारों को जवाब तलब किया, वहीं दूसरी ओर रुड़की के चर्चित हत्याकांड के दो आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
संविदा कर्मचारियों के मामले में रजिस्ट्रारों को नोटिस
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने तकनीकी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों से पूछा कि जब कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि नियमित नियुक्तियां होने तक कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नहीं हटाया जाएगा, तो फिर उन्हें सेवा से क्यों हटाया गया?
खंडपीठ ने सभी संबंधित रजिस्ट्रारों को मंगलवार (4 अगस्त) तक शपथपत्र दाखिल कर जवाब देने या स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर आदेश का पालन न करने का कारण बताने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता गौरव सेमवाल और अन्य ने अदालत में कहा कि राज्य सरकार के 28 मई 2026 के शासनादेश और तकनीकी शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद विश्वविद्यालयों ने 16 जून 2026 को नए विज्ञापन जारी कर संविदा कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त कर दिया, जो कोर्ट के आदेशों के विपरीत है।
रुड़की हत्याकांड: दो आरोपियों को नहीं मिली राहत
इसी दिन हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने रुड़की कोतवाली क्षेत्र के बहुचर्चित हत्याकांड में आरोपी जैद कुरैशी और अनस कुरैशी की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
दोनों आरोपी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) समेत अन्य गंभीर धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत 10 जुलाई 2025 से जेल में बंद हैं।
बचाव पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बरामद हथियारों में कथित विरोधाभास तथा अन्य सह-आरोपियों को मिली जमानत का हवाला दिया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर चिकित्सा साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करना उचित नहीं होगा और केवल सह-आरोपियों की जमानत के आधार पर समानता का लाभ नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया यह पूर्व नियोजित और सामूहिक रूप से किया गया गंभीर अपराध प्रतीत होता है। साथ ही संबंधित सत्र न्यायालय को निर्देश दिए कि मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाई जाए और बिना किसी बाहरी प्रभाव के मामले का शीघ्र निस्तारण किया जाए।


