बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में पेपर लीक! परीक्षा से पहले वायरल हुए प्रश्नपत्र, दो सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में पेपर लीक! परीक्षा से पहले वायरल हुए प्रश्नपत्र, दो सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द

देहरादून। देशभर में पेपर लीक को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उत्तराखंड से एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार देहरादून स्थित उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) की सेमेस्टर परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि हुई है।

परीक्षा शुरू होने से पहले ही दो विषयों के प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचने की जानकारी मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों परीक्षाएं रद्द कर दीं। इस फैसले से विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के हजारों छात्र प्रभावित हुए हैं।

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल ने पेपर लीक की पुष्टि करते हुए बताया कि ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ और ‘इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ विषयों की परीक्षाएं निरस्त कर दी गई हैं।

अब इन दोनों विषयों की परीक्षाएं अगस्त के तीसरे सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएंगी। नई परीक्षा की तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी बाद में जारी की जाएगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति के निर्देश पर एक जांच समिति गठित की गई। समिति की जांच में सामने आया कि एक संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज में तैनात एक प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कुछ छात्रों तक पहुंचा दिए थे।

जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें अगले सात वर्षों तक परीक्षा से जुड़े किसी भी कार्य से प्रतिबंधित कर दिया है।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर उत्तराखंड की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बीते कुछ वर्षों में राज्य में कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। अब तकनीकी विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षा में भी ऐसी घटना सामने आने से छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल आंतरिक जांच पूरी कर ली गई है और दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है। अब विश्वविद्यालय नई परीक्षा की तैयारियों में जुट गया है, जबकि हजारों विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए फिर से तैयारी करनी होगी।

यह मामला न केवल विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।