सिल्क्यारा टनल में फिर हादसा। लाइनिंग गिरने से झारखंड के श्रमिक की मौत, 2023 के रेस्क्यू की यादें फिर ताजा
- बड़कोट पोर्टल से 900 मीटर अंदर शॉटक्रीट का हिस्सा टूटा; NHIDCL करेगी जांच, सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
देहरादून। उत्तरकाशी जिले की सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग परियोजना में बुधवार तड़के एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया। बड़कोट साइड से करीब 900 मीटर अंदर निर्माणाधीन सुरंग की कंक्रीट लाइनिंग (शॉटक्रीट) का एक हिस्सा टूटकर गिर गया।
हादसे की चपेट में आने से झारखंड निवासी 21 वर्षीय श्रमिक नरेश की मौके पर ही मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है।
सुरंग निर्माण कर रही नवयुग कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीराम ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के तुरंत बाद श्रमिक को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
क्या होता है शॉटक्रीट?
टनल निर्माण के दौरान पहाड़ की खुदाई के बाद उसकी दीवारों और छत को मजबूत करने के लिए सीमेंट, रेत और विशेष मिश्रण को उच्च दबाव से स्प्रे किया जाता है। इसे शॉटक्रीट (Shotcrete) कहा जाता है।
यह सुरंग की सुरक्षा परत होती है, जो चट्टानों को टूटकर गिरने से रोकती है। इस परत का कोई हिस्सा टूटकर गिरने की घटना को लाइनिंग फेलियर या लाइनिंग ब्लॉक फॉल कहा जाता है, जिसे टनल निर्माण के सबसे गंभीर जोखिमों में गिना जाता है।
900 मीटर अंदर हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटना बड़कोट पोर्टल से लगभग 900 मीटर अंदर हुई, जहां श्रमिक निर्माण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान ऊपर लगी कंक्रीट लाइनिंग का एक ब्लॉक अचानक टूटकर नीचे गिर गया।
जिला आपदा परिचालन केंद्र (DEOC) के अनुसार हादसे के कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की विस्तृत जांच NHIDCL कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा होगा।
2023 की बड़ी त्रासदी फिर आई याद
यह वही सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग है, जहां 12 नवंबर 2023 को सुरंग का हिस्सा ढहने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। करीब 17 दिनों तक चले देश के सबसे बड़े और जटिल टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 28 नवंबर 2023 को सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
उस अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, बीआरओ, टनल विशेषज्ञों और रैट-होल माइनर्स की अहम भूमिका रही थी।
चारधाम परियोजना की अहम कड़ी
करीब 4.5 किलोमीटर लंबी सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बनने से धरासू और यमुनोत्री के बीच यात्रा दूरी और समय दोनों कम होंगे। परियोजना में आपातकालीन निकासी के लिए अलग एस्केप पैसेज भी प्रस्तावित है।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल
2023 की घटना के बाद निर्माणाधीन सुरंगों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई थी। अब उसी परियोजना में दोबारा हुए इस हादसे ने सुरक्षा मानकों, भूगर्भीय परिस्थितियों और लाइनिंग की गुणवत्ता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल सभी की नजर NHIDCL की जांच रिपोर्ट पर है, जिससे स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खामी, भूगर्भीय दबाव या निर्माण प्रक्रिया में किसी त्रुटि के कारण हुआ।

