मानसून की मार! रुद्रप्रयाग में बढ़ा बाढ़ का खतरा, चारधाम यात्रा प्रभावित। नैनीताल में मॉकड्रिल
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है, जहां बढ़ते जलस्तर के बीच बेलनी पुल के नीचे स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा लगभग छाती तक पानी में डूब गई है।
वहीं, श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच सिरोबगड़ स्लाइड जोन में भारी भूस्खलन के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है, जिससे चारधाम यात्रा प्रभावित हुई है और हजारों यात्री रास्ते में फंस गए हैं।
दूसरी ओर, नैनीताल जिले में संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए पांच स्थानों पर एक साथ बड़े स्तर पर मॉकड्रिल आयोजित की गई।
पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही बारिश के चलते अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
तेज बहाव के कारण तटीय क्षेत्रों में कटाव का खतरा बढ़ गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। रुद्रप्रयाग के बेलनी पुल के नीचे स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा का अधिकांश हिस्सा उफनती नदी में समा चुका है, जो मानसून के रौद्र रूप की भयावह तस्वीर पेश कर रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन, पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
ऐसे में स्थानीय लोगों, चारधाम यात्रियों और पर्यटकों से नदी-नालों के पास न जाने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि उफनती नदियों के किनारे वीडियो बनाना या सेल्फी लेना जानलेवा साबित हो सकता है।
बारिश का सबसे ज्यादा असर श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच स्थित सिरोबगड़ स्लाइड जोन में देखने को मिला, जहां पहाड़ी से लगातार मलबा और विशाल बोल्डर गिरने के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया।
हाईवे के दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए हैं, जबकि हजारों श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग घंटों से मार्ग खुलने का इंतजार कर रहे हैं। लगातार मलबा गिरने से सीमा सड़क संगठन और अन्य एजेंसियों को मार्ग खोलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सिरोबगड़ पिछले लगभग तीन दशकों से चारधाम यात्रा का सबसे संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र बना हुआ है। हर मानसून में यही स्थान यात्रा की रफ्तार थाम देता है। करोड़ों रुपये खर्च होने और कई तकनीकी उपाय अपनाने के बावजूद इस स्लाइड जोन का स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यात्रियों और ग्रामीणों को इसी समस्या का सामना करना पड़ता है और अब इसका स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
इधर, संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए नैनीताल जिले में गुरुवार को व्यापक मॉकड्रिल आयोजित की गई।
नैनीताल, हल्द्वानी, कालाढूंगी, बेतालघाट और लालकुआं में एक साथ पांच अलग-अलग काल्पनिक आपदा घटनाएं तैयार कर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) सक्रिय करते हुए सभी संबंधित विभागों की टीमों को तत्काल मौके पर रवाना किया।
नैनीताल के मल्लीताल स्थित आलमा कॉटेज क्षेत्र में भूस्खलन की काल्पनिक घटना पर एसडीआरएफ, पुलिस, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, जल संस्थान, विद्युत विभाग, पशुपालन विभाग, जिला पंचायत, 99 माउंटेन ब्रिगेड तथा एनसीसी के कैडेटों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया।
अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से घायलों को सुरक्षित निकालकर चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया। वहीं बेतालघाट में सड़क अवरुद्ध होने, कालाढूंगी में पुल क्षतिग्रस्त होने, हल्द्वानी के गौलापार में भू-कटाव और लालकुआं में गौला नदी में बाढ़ जैसी काल्पनिक परिस्थितियों में भी राहत एवं बचाव कार्य का अभ्यास किया गया।
हालांकि मॉकड्रिल के दौरान राहत एवं बचाव दल की सक्रियता संतोषजनक रही, लेकिन स्टेजिंग एरिया में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आपदा जैसी तत्परता अपेक्षाकृत कम दिखाई दी।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य किसी भी वास्तविक आपदा के समय विभागों के बीच बेहतर तालमेल, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था।
प्रदेश में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा से पहले मौसम और सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लेने तथा किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। फिलहाल उत्तराखंड में मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

