हाईकोर्ट में मदरसा शिक्षकों के वेतन पर सरकार को नोटिस, IIM प्रोफेसर को राहत, चुनावी याचिका खारिज
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों में बड़े आदेश सामने आए। अदालत ने एक ओर मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किए जाने पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया।
वहीं दूसरी ओर आईआईएम काशीपुर के पूर्व प्रोफेसर के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को समाप्त घोषित कर दिया। इसके अलावा हरिद्वार के एक संपत्ति विवाद मामले में आरोपियों को अंतरिम राहत मिली, जबकि नरेंद्रनगर नगरपालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी गई।
मदरसा शिक्षकों के वेतन भुगतान पर सरकार से जवाब तलब
उत्तराखंड हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मदरसों में कार्यरत शिक्षकों को वर्षों से लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि पूर्व आदेश के बावजूद अभी तक भुगतान क्यों नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2006 और 2008 में एक सरकारी योजना के तहत हुई थी तथा उन्हें वर्ष 2015 तक 12 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता रहा। अप्रैल 2016 से भुगतान बंद होने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में उनके पक्ष में आदेश देते हुए भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन करीब नौ माह बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ। अब अदालत ने मामले में 10 जून तक जवाब मांगा है।
IIM काशीपुर के पूर्व प्रोफेसर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) काशीपुर के पूर्व प्रोफेसर के.एम. बहरुल इस्लाम के खिलाफ चल रही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई को समाप्त करार दिया।
खंडपीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद नियोक्ता और कर्मचारी के बीच सेवकीय संबंध समाप्त हो जाते हैं। ऐसे में विभागीय जांच को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं बचता।
अदालत ने संस्थान को निर्देश दिया कि प्रोफेसर के लंबित वित्तीय देयों का भुगतान तीन माह के भीतर किया जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ जारी आरोपपत्र भविष्य में रोजगार प्राप्त करने में बाधा नहीं बनेंगे।
हरिद्वार संपत्ति विवाद में आरोपियों को अंतरिम राहत
हरिद्वार में दर्ज एक कथित धोखाधड़ी के मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने वर्ष 2022 में विवादित संपत्ति की विधिवत रजिस्टर्ड बिक्री विलेख के माध्यम से खरीद की थी और 10 लाख रुपये का भुगतान आरटीजीएस से किया गया था।
दूसरी ओर शिकायतकर्ता का आरोप है कि ट्रस्ट बनाने के नाम पर धोखाधड़ी कर संपत्ति की बिक्री कराई गई। मामले में अदालत ने निजी प्रतिवादी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नरेंद्रनगर नगरपालिका चुनाव मामले में याचिका खारिज
टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर नगरपालिका अध्यक्ष पद के दावेदार राजेंद्र सिंह गुसाईं को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने नामांकन पत्र में तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया था तथा लाभ के पद और आय संबंधी जानकारी भी छिपाई गई थी। आयोग ने विस्तृत जांच के बाद नामांकन निरस्त किया था। अदालत ने आयोग की कार्रवाई को सही मानते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट में एक दिन में चार अहम मामलों पर सुनवाई
इन चारों मामलों में आए आदेशों ने प्रशासन, शिक्षा, चुनाव और आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावित किया है।
विशेष रूप से मदरसा शिक्षकों के भुगतान और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर हाईकोर्ट की टिप्पणियां आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बन सकती हैं।


