241 लावारिस शवों को दी सम्मानजनक विदाई, इंसानियत की मिसाल बनी टीम
हल्द्वानी। शहर में एक बार फिर इंसानियत और मानव सेवा की मिसाल देखने को मिली। पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार प्रयासों के बावजूद जब एक अज्ञात शव की पहचान नहीं हो सकी, तब समाजसेवी हेमंत गौनिया और उनकी टीम ने आगे बढ़कर पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया।
पुलिस के अनुसार मृतक की उम्र करीब 38 वर्ष थी। उसका रंग सांवला, दाढ़ी-बाल खिचड़ी और शरीर मजबूत बताया गया। शव को तीन दिनों तक सुशीला तिवारी अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया और परिजनों की तलाश की गई, लेकिन कोई भी व्यक्ति पहचान के लिए सामने नहीं आया।
पंचायतनामा और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद समाजसेवी हेमंत गौनिया एवं उनकी टीम शव को हल्द्वानी-टनकपुर रोड स्थित गोला गेट मुक्तिधाम लेकर पहुंची, जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
समाजसेवियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उनकी टीम अब तक 241 लावारिस और अज्ञात शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करा चुकी है। टीम लगातार बिना किसी सरकारी सहायता या NGO सहयोग के केवल जनसहयोग से यह मानव सेवा का कार्य कर रही है।
समाजसेवी हेमंत गौनिया ने बताया कि रानीबाग स्थित इलेक्ट्रिक शवदाह मशीन की सर्विसिंग चलने के कारण फिलहाल वह बंद है, जिसके चलते इस अंतिम संस्कार में लकड़ी का उपयोग करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि एक अंतिम संस्कार में एंबुलेंस, कफन, लकड़ी और अन्य सामग्री सहित हजारों रुपये का खर्च आता है, जिसे समाजसेवी और सहयोगी मिलकर वहन करते हैं।
इस सेवा कार्य में वंश गौनिया, अमित रस्तोगी, रेंजर नवल किशोर कपिल, दिशा सामाजिक संगठन और अन्य समाजसेवियों ने सहयोग दिया। वहीं मुक्तिधाम समिति हल्द्वानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समाजसेवियों ने आमजन से अपील की है कि मानवता से जुड़े इस कार्य में आगे आकर सहयोग करें, ताकि कोई भी व्यक्ति अंतिम समय में खुद को लावारिस और असहाय महसूस न करे।

