‘कैश विवाद’ के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा
नई दिल्ली। यशवंत वर्मा ने ‘घर पर नकदी मिलने’ के कथित विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा द्रौपदी मुर्मू को सौंपा और इसकी एक प्रति सूर्यकांत को भी भेजी।
जस्टिस वर्मा ने अपने इस्तीफे में लिखा कि “बड़े दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे राष्ट्रपति के गरिमामय पद पर अपने इस्तीफे के कारणों का बोझ नहीं डालना चाहते। साथ ही, उन्होंने न्यायाधीश के रूप में सेवा देना अपने लिए सम्मान की बात बताया।
जांच के बीच आया इस्तीफा
यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब उनके खिलाफ लोकसभा में जांच प्रक्रिया जारी है। ओम बिरला ने जजेस (जांच) एक्ट, 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।
इस समिति में शामिल हैं:-
- अरविंद कुमार (सुप्रीम कोर्ट जज)
- श्री चंद्रशेखर
- वासुदेव आचार्य
यह कदम तब उठाया गया था, जब लोकसभा के 146 सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 14 मार्च 2025 की उस घटना से जुड़ा है, जब आग बुझाने के दौरान उनके सरकारी आवास (तत्कालीन दिल्ली हाई कोर्ट जज) के एक बाहरी कमरे में कथित तौर पर भारी मात्रा में बिना हिसाब-किताब वाली नकदी मिलने का दावा किया गया था।
इसी मामले को लेकर राजनीतिक और न्यायिक स्तर पर गंभीर सवाल उठे, जिसके बाद जांच और महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई।
आगे क्या?
- अब इस्तीफे के बाद यह देखना अहम होगा कि,
- क्या जांच प्रक्रिया जारी रहेगी?
- क्या इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होती है?
यह घटनाक्रम न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को भी जन्म दे रहा है।



