बिग ब्रेकिंग: चारधाम में गैर सनातनियों की एंट्री पर विवाद, मंत्री ने दी एकता की नसीहत

चारधाम में गैर सनातनियों की एंट्री पर विवाद, मंत्री ने दी एकता की नसीहत

देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम के मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर उठी बहस अब धीरे-धीरे संवेदनशील सामाजिक मुद्दे का रूप लेती जा रही है।

इस बीच राज्य सरकार के मंत्री खजान दास ने इस विवाद पर संतुलित बयान देते हुए कहा है कि समाज को बांटकर कभी सुख नहीं मिल सकता और इस तरह की चर्चाएं सामाजिक एकता के लिए घातक साबित हो सकती हैं।

दरअसल, बदरीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम से जुड़े मंदिर समितियों और तीर्थ पुरोहितों के कुछ बयानों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध की बात सामने आई है। इन बयानों के बाद राज्य में बहस तेज हो गई है और मामला धार्मिक आस्था से आगे बढ़कर सामाजिक संतुलन से जुड़ता नजर आ रहा है।

मंत्री खजान दास ने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांत और धार्मिक राज्य में इस तरह की बहस पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि धार्मिक आस्था हर व्यक्ति का निजी विषय है, लेकिन जब उसी के नाम पर समाज में विभाजन की रेखाएं खींची जाती हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

उन्होंने पिरान कलियर दरगाह का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हर धर्म के लोग अपनी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा को दर्शाता है। उनके इस बयान को सरकार के भीतर से आए एक संतुलित और समावेशी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर, मंदिर समितियों और प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह मुद्दा पूरी तरह धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं से जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि धामों की पवित्रता बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और इसी आधार पर ऐसे विचार सामने रखे जा रहे हैं।

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम से जुड़े कुछ तीर्थ पुरोहितों के बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। खासतौर पर गैर सनातनियों के लिए पंचगव्य सेवन जैसी शर्तों की चर्चा के बाद इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।

इस बीच सरकार ने इस मामले पर फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया है कि अभी तक सरकार के पास मंदिर समितियों की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो उसका कानूनी, सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं के आधार पर परीक्षण किया जाएगा।

उधर, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मंदिर समितियों के अधिकारों का समर्थन करते हुए कहा कि हर धर्म को अपने धार्मिक स्थलों के नियम तय करने का अधिकार है।

फिलहाल, यह विवाद उत्तराखंड में आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता के बीच संतुलन की एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।