शर्मनाक: यूपी के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही की हदें पार, मरीजों के बेड पर कुत्ते और दवाइयों पर चूहे

यूपी के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही की हदें पार, मरीजों के बेड पर कुत्ते और दवाइयों पर चूहे

रिपोर्ट: मीनाक्षी सिंह गौर
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। गोंडा मेडिकल कॉलेज और बिजनौर जिला अस्पताल से सामने आईं तस्वीरें और वीडियो न केवल प्रशासन की लापरवाही उजागर करती हैं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

कहीं मरीजों के बेड पर आवारा कुत्ते आराम फरमाते नजर आए, तो कहीं मरीज की दवाइयों और खाने पर चूहे टूट पड़े।

गोंडा मेडिकल कॉलेज: Ortho Ward-2 में मरीजों की जगह कुत्ते

गोंडा मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो वार्ड-2 का एक वीडियो जनवरी 2026 के मध्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वार्ड के अंदर मरीजों के बेड पर आवारा कुत्ते सो रहे हैं, जबकि आसपास मरीज इलाज के लिए भर्ती हैं।

वीडियो सामने आते ही अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यही वार्ड पहले भी चूहों की मौजूदगी को लेकर विवादों में रह चुका है। यानी संक्रमण और अव्यवस्था का खतरा लंबे समय से बना हुआ था, लेकिन समय रहते कोई ठोस सुधार नहीं किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया है और जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

घटना का संक्षिप्त विवरण (गोंडा)

  • स्थान: गोंडा मेडिकल कॉलेज
  • वार्ड: Ortho Ward-2
  • मामला: मरीजों के बेड पर आवारा कुत्ते
  • पूर्व स्थिति: उसी वार्ड में चूहों की मौजूदगी का वीडियो
  • कार्रवाई: 5 सदस्यीय जांच टीम गठित

बिजनौर जिला अस्पताल: मरीज की दवाइयों पर चूहा

वहीं, बिजनौर जिला मेडिकल हॉस्पिटल से सामने आए वीडियो भी उतने ही भयावह हैं। वायरल फुटेज में एक मरीज बेड पर लेटा हुआ है और ठीक पास रखी स्टील रैक पर चूहा मरीज की दवाइयों और खाने को कुतरता दिखाई दे रहा है।

यह दृश्य न केवल अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि मरीजों को किस तरह असुरक्षित हालात में इलाज के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

अस्पताल, जो इलाज और भरोसे की जगह माने जाते हैं, वहीं अगर संक्रमण फैलाने वाले चूहे खुलेआम घूम रहे हों, तो यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

गोंडा और बिजनौर दोनों ही घटनाएं यह साबित करती हैं कि प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में न तो साफ-सफाई की प्रभावी व्यवस्था है और न ही निगरानी तंत्र मजबूत। आवारा जानवर और चूहे अस्पतालों के वार्ड तक पहुंच रहे हैं, जिससे संक्रमण, बीमारी और जानलेवा परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि जांच टीमों की रिपोर्ट के बाद सिर्फ कागजी कार्रवाई और बयानबाजी होगी या वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कर अस्पतालों की व्यवस्था सुधारी जाएगी। क्योंकि यह मामला सिर्फ अव्यवस्था का नहीं, बल्कि मरीजों की जान का है।