इंद्रेश अस्पताल में फायर सेफ्टी अलर्ट। मॉक ड्रिल से सिखाए गए बचाव के गुर

इंद्रेश अस्पताल में फायर सेफ्टी अलर्ट। मॉक ड्रिल से सिखाए गए बचाव के गुर

देहरादून। श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में शनिवार को आयोजित फायर सेफ्टी कार्यशाला और मॉक ड्रिल के माध्यम से आगजनी जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए जागरूकता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में Fire Brigade Dehradun की टीम ने अस्पताल स्टाफ को महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि आग लगने की स्थिति में घबराहट नहीं, बल्कि सही तैयारी और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

कार्यशाला की शुरुआत फायर ब्रिगेड देहरादून के प्रभारी राजेश कुमार के व्याख्यान से हुई। इस दौरान उन्होंने आग लगने पर त्वरित प्रतिक्रिया, मरीजों की सुरक्षित निकासी, भीड़ प्रबंधन और रेस (RACE) प्रोटोकॉल के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

फायर ब्रिगेड के पंप ऑपरेटर सुनील रावत ने बताया कि अस्पतालों में नियमित मॉक ड्रिल और स्टाफ को फायर उपकरणों के उपयोग की ट्रेनिंग देना बेहद जरूरी है, ताकि आपात स्थिति में अफरा-तफरी से बचा जा सके और जान-माल का नुकसान कम हो।

विशेषज्ञों ने बताया कि आग की घटनाएं कभी भी हो सकती हैं, इसलिए अस्पतालों के साथ-साथ आवासीय भवनों और अपार्टमेंट्स में भी फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र और इमरजेंसी एग्जिट जैसे सुरक्षा इंतजाम हमेशा दुरुस्त रहने चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान अस्पताल परिसर में मॉक ड्रिल कर फायर फाइटिंग का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिससे स्टाफ को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिला।

इस दौरान कर्मचारियों को सिखाया गया कि आग लगने पर तुरंत अलार्म बजाएं, फायर ब्रिगेड को सूचना दें और सुरक्षित मार्गों से बाहर निकलें।

इस अवसर पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (प्रशासन) डॉ. गौरव रतूड़ी, चिकित्सा अधीक्षक (ऑपरेशंस) डॉ. वीरेन्द्र वर्मा, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डॉ. अबिन पाल, फायर सेफ्टी सुपरवाइजर अनिरुद्ध सिंह सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

यह पहल न केवल अस्पताल बल्कि सभी संस्थानों और आवासीय परिसरों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि सतर्कता, प्रशिक्षण और उचित संसाधनों के साथ ही आग जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।