बड़ी खबर: पौड़ी में बढ़ते वन्यजीव हमले। गुलदार ने महिला की ली जान, भालू के 12 हमले भी दर्ज, दहशत में ग्रामीण

पौड़ी में बढ़ते वन्यजीव हमले। गुलदार ने महिला की ली जान, भालू के 12 हमले भी दर्ज, दहशत में ग्रामीण

पौड़ी। उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। कभी गुलदार तो कभी भालू, बाघ, हाथी और विषैले सांपों के हमले से लोग घायल हो रहे हैं और कई मौतें भी सामने आ चुकी हैं।

इसी कड़ी में पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लॉक के कोटी गांव में घास काटने गई गिन्नी देवी पर गुलदार ने हमला कर उन्हें मार डाला। महिला घर से लगभग 300 मीटर दूर खेतों में थी, तभी घात लगाए गुलदार ने उन्हें शिकार बना लिया। घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई। विभाग ने ग्रामीणों से अकेले जंगल न जाने, एहतियात बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देने की अपील की है।

भालू के हमलों ने बढ़ाई चिंता: अब तक 12 लोग घायल, 53 मवेशी मारे

पौड़ी जिले में भालू का आतंक भी लगातार बढ़ रहा है। इस साल जनवरी 2025 से 20 नवंबर 2025 तक भालू के हमलों में 12 लोग घायल हुए हैं जबकि 53 मवेशी भालू का शिकार बने हैं। एक व्यक्ति की मौत भी हुई है।

पैठाणी रेंज, कल्जीखाल और थलीसैंण क्षेत्रों में भालू की असामान्य सक्रियता देखने को मिल रही है। वन विभाग के अनुसार, सर्दियों में भालू आमतौर पर हाइबरनेशन में रहते हैं, लेकिन इस बार कई भालू भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे हैं।

थलीसैंण और पैठाणी रेंज में दहशत

इन क्षेत्रों में ग्रामीण खेतों और जंगल की ओर जाने से डर रहे हैं। हाल ही में पैठाणी रेंज में भालू ने कई मवेशियों पर हमला किया और गंभीर नुकसान पहुंचाया। वन विभाग ने विशेष टीम लगाकर गश्त बढ़ाई है और ट्रेंकुलाइजिंग टीम भी तैनात की गई थी, लेकिन भालू की मूवमेंट फिर बढ़ गई है।

जिवई गांव में महिला पर हमला

17 नवंबर को बीरोंखाल ब्लॉक के जिवई गांव में घास काटने गई लक्ष्मी देवी (40) पर झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक हमला कर दिया। महिला की आंख और सिर पर गंभीर चोटें आईं और उसे हायर सेंटर भेजना पड़ा।

वन विभाग की चेतावनी और सलाह

  • जंगल या सुनसान इलाकों में अकेले न जाएं
  • समूह में जाएं और रास्ते में आवाज करते रहें
  • लाठी लेकर चलें
  • किसी भी वन्यजीव की गतिविधि पर तुरंत विभाग को सूचना दें

वन विभाग का कहना है कि उद्देश्य भालू या गुलदार को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव को रोकना है। विभाग उम्मीद कर रहा है कि तापमान में गिरावट के साथ भालू जंगलों में लौट जाएंगे, लेकिन तब तक ग्रामीणों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।