गजब: उत्तराखंड में फर्जी शासनादेश का खुलासा, उपनल कर्मियों को मिला अतिरिक्त भुगतान

उत्तराखंड में फर्जी शासनादेश का खुलासा, उपनल कर्मियों को मिला अतिरिक्त भुगतान

रिपोर्ट- राजकुमार धीमान
देहरादून। उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में फर्जी शासनादेश (जीओ) के जरिए लाखों रुपये के भुगतान का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने कथित तौर पर एक फर्जी शासनादेश को असली मानते हुए उपनल कर्मियों को ‘समान कार्य, समान वेतन’ के तहत न्यूनतम वेतनमान जारी कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि जिस सचिव और अवर सचिव के नाम से आदेश जारी हुआ, उस नाम के कोई अधिकारी शासन में तैनात ही नहीं हैं।

निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अजय कुमार आर्य के आदेश के क्रम में जारी इस भुगतान से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला सामने आने के बाद अधिकारी अपनी चूक छिपाने और फर्जी शासनादेश के प्रभाव को खत्म करने के उपाय तलाशने में जुट गए हैं।

जानकारी के अनुसार, फर्जी जीओ सभी अपर मुख्य सचिवों, सचिवों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को संबोधित करते हुए जारी किया गया था।

इसी आधार पर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने उपनल कर्मियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ दे दिया और दून मेडिकल कॉलेज पर भी इसे लागू करने का दबाव बनाया गया।

दून मेडिकल College में तैनात 109 उपनल कर्मियों को लाभ मिलने से पहले कुछ अधिकारियों की सतर्कता से मामला पकड़ में आ गया। आशंका जताई जा रही है कि अन्य विभागों में भी इसी तरह के फर्जी आदेशों के जरिए वित्तीय अनियमितता की कोशिश की गई हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार, फर्जी शासनादेश के आधार पर प्रत्येक कर्मचारी को करीब 20 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ दिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड कौन है, शासनादेश कैसे तैयार हुआ और बिना सत्यापन के इसे लागू करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी।