राजनीति: उत्तराखंड में चुनावी रणभेरी! अमित शाह की एंट्री, अलकनंदा पर आर-पार, मसूरी में मारपीट। अंकिता-जेनी प्रकरण से गरमाई सियासत

उत्तराखंड में चुनावी रणभेरी! अमित शाह की एंट्री, अलकनंदा पर आर-पार, मसूरी में मारपीट। अंकिता-जेनी प्रकरण से गरमाई सियासत

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है। सरकारी संपत्तियों को पीपीपी मोड पर देने के फैसले से लेकर जमीनों को निजी कंपनियों को लीज पर देने तक के मुद्दे पर कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

हरिद्वार में होटल अलकनंदा को पीपीपी मोड पर देने के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया, तो मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट की जमीन को लीज पर देने के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आंदोलन के दौरान भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई।

इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 6 नवंबर के देहरादून दौरे को भाजपा चुनावी शंखनाद के रूप में देख रही है।

वहीं, अंकिता भंडारी प्रकरण में उनके माता-पिता की गिरफ्तारी और 23 साल पुराने जेनी प्रकरण की दोबारा चर्चा ने प्रदेश की राजनीति को और गरमा दिया है।

होटल अलकनंदा के निजीकरण पर आमने-सामने कांग्रेस-भाजपा

हरिद्वार में होटल अलकनंदा को पीपीपी मोड पर लीज पर दिए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने होटल अलकनंदा के घाट पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार के फैसले का विरोध किया। प्रदर्शन में विधायक अनुपमा रावत, रवि बहादुर समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।

हरीश रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रदेश की बहुमूल्य सरकारी संपत्तियों को लीज के नाम पर कौड़ियों के भाव निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है।

इससे भाजपा के कोष में वृद्धि हो सकती है, लेकिन उत्तराखंड आर्थिक रूप से कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि होटल अलकनंदा उत्तराखंड की महत्वपूर्ण संपत्ति है और कांग्रेस इसे निजी हाथों में नहीं जाने देगी।

हरीश रावत ने परिसंपत्तियों के बंटवारे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच होटल अलकनंदा को लेकर लंबे समय तक विवाद रहा।

वर्ष 2023 में दोनों राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद यह संपत्ति उत्तराखंड को मिली थी। अब इसे पीपीपी मोड पर देने का फैसला राज्यहित के खिलाफ है।

कांग्रेस के प्रदर्शन के जवाब में भाजपा कार्यकर्ता भी मैदान में उतर आए। बैरागी कैंप के गेट पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लेकर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालांकि पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं को रास्ते में ही रोक दिया।

भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कांग्रेस पर चुनावी लाभ के लिए विकास कार्यों का विरोध करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि धामी सरकार सरकारी संपत्तियों को संरक्षित कर उनसे राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। होटल अलकनंदा की संपत्ति उत्तराखंड को दिलाना सरकार की उपलब्धि है।

142 एकड़ जमीन पर सियासी घमासान, मसूरी में भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में मारपीट

मसूरी के ऐतिहासिक जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट स्थित हाथीपांव की करीब 142 एकड़ भूमि को निजी कंपनी को लीज पर दिए जाने का मामला भी राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है।

इस फैसले के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान के तहत प्रदर्शन किया गया।

कांग्रेस ने मांग की कि भूमि लीज पर देने की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए और सरकारी जमीन से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। पार्टी का कहना है कि उत्तराखंड की जमीन, विरासत और जनता के अधिकारों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।

इसी दौरान कांग्रेस के प्रदर्शन के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने गणेश गोदियाल को काले झंडे दिखाए। देखते ही देखते दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो हाथापाई में बदल गई।

इस दौरान मसूरी भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगा। भाजपा की ओर से पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता और उनके साथियों पर हमला करने का आरोप लगाया गया। भाजपा नेताओं का दावा है कि रजत अग्रवाल के कपड़े फाड़े गए और उन पर लाठियों से वार किया गया।

घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हुई। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक गुंडागर्दी का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदर्शन में उमड़ी भीड़ देखकर भाजपा बौखला गई है और बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं।

अमित शाह के दौरे से भाजपा का चुनावी शंखनाद, 25 हजार कार्यकर्ताओं को जुटाने की तैयारी

उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का 6 नवंबर को प्रस्तावित देहरादून दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा इस दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है।

तय कार्यक्रम के अनुसार अमित शाह देहरादून के परेड ग्राउंड में पदयात्रा और जनसभा में शामिल होंगे। यह आयोजन ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान से जोड़ा गया है।

भाजपा का दावा है कि देहरादून महानगर, ऋषिकेश, देहरादून ग्रामीण और हरिद्वार से करीब 25 हजार से अधिक कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल होंगे।

पार्टी ने रायपुर, राजपुर, धर्मपुर, कैंट और मसूरी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की बैठकें कर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके अलावा काशीपुर और जसपुर से भी करीब एक हजार कार्यकर्ताओं को लाने की तैयारी है।

कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि अमित शाह के दौरे से कार्यकर्ताओं में उत्साह है और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उन्हें दिशा-निर्देश मिलेंगे।

भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि जनसभा के माध्यम से अमित शाह कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य को लेकर मार्गदर्शन देंगे।

वहीं, कांग्रेस प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने अमित शाह के दौरे पर सवाल उठाते हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री को इस मामले में जवाब देना चाहिए।

अंकिता भंडारी के माता-पिता की गिरफ्तारी से सियासत गरमाई

अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। अंकिता के माता-पिता की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी खेमे से इसे लेकर भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा जा रहा है।

आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार अंकिता के माता-पिता से भयभीत है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका और सीबीआई जांच की प्रगति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गौरतलब है कि पौड़ी जिले के श्रीकोट डोभ गांव की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को वह लापता हुई थीं और 24 सितंबर को चीला बैराज क्षेत्र की नहर से उनका शव बरामद हुआ था।

इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों अंकित गुप्ता तथा सौरभ भास्कर को अदालत ने 30 मई 2025 को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सीबीआई जांच की मांग लगातार उठती रही है। अब माता-पिता की गिरफ्तारी के बाद यह मामला फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

23 साल पुराना जेनी प्रकरण फिर चर्चा में, महिला ने सबूतों के साथ सामने आने का किया दावा

उत्तराखंड की राजनीति में 23 साल पुराना जेनी प्रकरण भी एक बार फिर सुर्खियों में है। खुद को जेनी बताने वाली एक महिला ने वीडियो जारी कर दावा किया है कि वह जल्द ही सबूतों के साथ सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखेगी।

महिला ने राजनीतिक दलों और नेताओं पर अपने नाम का इस्तेमाल कर एक-दूसरे पर आरोप लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था, इसकी जानकारी केवल उन्हें है और उनके पास इससे जुड़े साक्ष्य भी हैं।

यह विवाद उस समय का है, जब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार थी और हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। उस दौरान एक महिला ने नौकरी दिलाने के नाम पर शारीरिक शोषण और बच्चे की पितृत्व को लेकर आरोप लगाए थे।

हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में इस प्रकरण का जिक्र कर कांग्रेस पर निशाना साधा था। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के बीच भी बयानबाजी हुई। हरक सिंह रावत ने दावा किया कि वह डीएनए जांच और सीबीआई जांच में पाक-साफ निकले थे।

अब खुद को जेनी बताने वाली महिला के सबूतों के साथ सामने आने के दावे ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, उनके अगले बयान और कथित साक्ष्यों की वास्तविकता सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

2027 से पहले मुद्दों की राजनीति, सड़क से सोशल मीडिया तक तेज हुआ संघर्ष

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर भले ही अभी कई महीने बाकी हों, लेकिन भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला तेज हो गया है।

भाजपा जहां अमित शाह के दौरे, जनसभाओं और संगठनात्मक बैठकों के जरिए चुनावी माहौल बनाने में जुटी है, वहीं कांग्रेस सरकारी संपत्तियों, जमीनों, अंकिता भंडारी हत्याकांड और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रही है।

हरिद्वार का होटल अलकनंदा हो या मसूरी का जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट, दोनों ही मामले सरकारी संपत्तियों और उनके प्रबंधन से जुड़े हैं। वहीं अंकिता भंडारी और जेनी प्रकरण ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और धार दे दी है।

मसूरी में कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प ने राजनीतिक संघर्ष को सड़क तक पहुंचा दिया है। ऐसे में साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत में मुद्दों, आरोपों, आंदोलनों और शक्ति प्रदर्शन का दौर और तेज होने वाला है।