‘सदाराम’ बनकर हरिद्वार में रह रहा था सुरेंद्र कोली, मौत के बाद सामने आया सच
हरिद्वार। नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से चर्चाओं में आए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। वह उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में लालमाता मंदिर के सामने चाय का खोखा चला रहा था। दुकान के अंदर उसका शव मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस का कहना है कि मौत के कारणों की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी।
जेब से मिले दो आधार कार्ड, खुली पहचान
पुलिस के मुताबिक, मृतक की जेब की तलाशी के दौरान दो आधार कार्ड मिले। इनमें से एक में नाम सदाराम पुत्र शंकर और दूसरे में सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर कोली दर्ज था।
इसी आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान की। आधार कार्ड में उसका पता डी-5, सेक्टर-31, नोएडा, गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश दर्ज बताया गया है।
पुलिस के सामने यह भी आया कि हरिद्वार में सुरेंद्र कोली अपनी पहचान छिपाकर सदाराम के नाम से रह रहा था। आसपास के लोगों और दुकान मालिक को भी उसकी वास्तविक पहचान की जानकारी नहीं थी।
तीन महीने पहले आया था हरिद्वार
जानकारी के अनुसार सुरेंद्र कोली करीब तीन महीने पहले हरिद्वार आया था। पहले वह मुस्तफाबाद गांव में रहा और बाद में रोशनाबाद क्षेत्र में रहने लगा। वहां उसकी पहचान धर्मेंद्र नाम के व्यक्ति से हुई।
बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र ने उसे अनिल शर्मा का खोखा किराए पर दिलाया था। करीब चार दिन पहले ही उसने लालमाता मंदिर के सामने खोखे में चाय की दुकान शुरू की थी।
इससे पहले सुरेंद्र सिडकुल क्षेत्र में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था। करीब 15 दिन पहले उसने नौकरी छोड़ दी थी और इसके बाद चाय की दुकान शुरू करने का प्रयास कर रहा था।
आर्थिक परेशानी और पारिवारिक विवाद की बात सामने आई
पुलिस की शुरुआती जांच में आर्थिक परेशानी और पारिवारिक विवाद की बातें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि परिवार में बच्चे के जन्मदिन को लेकर भी विवाद चल रहा था। हालांकि पुलिस ने अभी आत्महत्या के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं की है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी के अनुसार, शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। घटनास्थल से मिले तथ्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ के आधार पर मामले की जांच जारी है। आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।
अल्मोड़ा के मंगरुखाल गांव से था संबंध
सुरेंद्र कोली का उत्तराखंड से भी गहरा संबंध था। वह अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे ब्लॉक के मंगरुखाल गांव का रहने वाला था। परिवार के अनुसार, वह चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसके पिता शाकरू राम और मां कुंती देवी थीं। उसके भाई दिल्ली और मासी क्षेत्र में रहते हैं।
रोजगार की तलाश में वह वर्षों पहले दिल्ली गया था, जहां बाद में उसका नाम निठारी कांड में सामने आया। उसकी शादी शांति देवी से हुई थी। जब वह जेल गया था, तब उसकी एक बेटी थी और उसका बेटा पत्नी के गर्भ में था।
करीब 21 साल जेल में रहने के बाद हुआ था दोषमुक्त
निठारी कांड में नाम सामने आने के बाद सुरेंद्र कोली करीब दो दशक तक जेल में रहा। वर्ष 2014 में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी और डेथ वारंट भी जारी हुआ था। बाद में विभिन्न मामलों की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कानूनी लड़ाई आगे बढ़ी।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े मामलों में उसे दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद वह सामान्य जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहा था और कुछ समय पहले हरिद्वार आकर रहने लगा था।
जून में आखिरी बार गांव पहुंचा था
दोषमुक्त होने के बाद सुरेंद्र कोली जून में आखिरी बार अपने पैतृक गांव मंगरुखाल पहुंचा था। परिवार की ओर से आयोजित पूजा-पाठ के कार्यक्रम में चारों भाई शामिल हुए थे। ग्रामीणों के अनुसार उस दौरान उसका व्यवहार सामान्य था और उसने लोगों से बातचीत भी की थी।
बताया जा रहा है कि गांव का पुश्तैनी मकान अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। जून में सुरेंद्र अपने छोटे भाई आनंद कोली के घर पर ठहरा था।
सुरेंद्र कोली की मौत की खबर मिलने के बाद उसके भाई दिल्ली से हरिद्वार के लिए रवाना हो गए हैं। सल्ट के पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत भी हरिद्वार पहुंचे हैं। परिवार के हरिद्वार पहुंचने के बाद ही अंतिम कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।


