सड़क के लिए श्रमदान, OPS की मांग और अस्पतालों में घूमते आवारा पशु
रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
देहरादून। उत्तराखंड में रविवार को जनता की बुनियादी समस्याओं और सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर तीन अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं।
चमोली के सकंड गांव में सड़क सुविधा नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने खुद ही श्रमदान कर सड़क निर्माण शुरू कर दिया, जबकि देहरादून में प्रदेशभर से जुटे कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच किया।
वहीं थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अस्पताल परिसर के भीतर आवारा पशुओं की मौजूदगी ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव में वर्षों से सड़क सुविधा नहीं मिलने से ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया।
शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लगातार ज्ञापन देने के बावजूद सड़क निर्माण शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने अपने संसाधनों और श्रमदान से सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया। ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीण गेती, फावड़ा और बेलचा लेकर सड़क कटिंग में जुटे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए आज भी करीब नौ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, जिससे बीमार, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा गया तो वे चुनाव बहिष्कार करेंगे।
वहीं राजधानी देहरादून में पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के बैनर तले प्रदेशभर से आए कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकाला।
पुलिस ने हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद कर्मचारियों ने वहीं धरना-प्रदर्शन किया।
संगठन के प्रांतीय महामंत्री मुकेश रतूड़ी ने कहा कि उनकी एकमात्र मांग 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की है।
कर्मचारियों का आरोप है कि नई पेंशन योजना और यूनिफाइड पेंशन योजना बाजार आधारित हैं, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती। उन्होंने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
इधर चमोली जिले के थराली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अस्पताल परिसर के भीतर आवारा पशुओं के घूमने का मामला भी चर्चा में रहा।
स्थानीय लोगों ने अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में पशुओं की आवाजाही पर चिंता जताते हुए मरीजों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
लोगों का कहना है कि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ने के साथ ही मरीजों और तीमारदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव सिंह पॉल ने कहा कि अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं के घूमने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं थी। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए अस्पताल प्रबंधन से रिपोर्ट तलब कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर सड़क, पेंशन और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता का कहना है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में जनाक्रोश और बढ़ सकता है।


