रामनगर में लोक अदालत का बहिष्कार, देहरादून में 12,444 मामलों का निस्तारण
देहरादून। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के बीच उत्तराखंड में न्यायिक व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं। एक ओर नैनीताल जिले के रामनगर में एपीओ और अधिवक्ताओं के बीच विवाद के चलते बार एसोसिएशन ने लोक अदालत का बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन किया।
वहीं दूसरी ओर देहरादून जनपद में राष्ट्रीय लोक अदालत ने रिकॉर्ड निस्तारण करते हुए एक ही दिन में 12,444 मामलों का समाधान कराया और 30.33 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पर समझौता हुआ।
रामनगर में एपीओ के खिलाफ अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
रामनगर बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने शनिवार को लोक अदालत का बहिष्कार करते हुए न्यायालय परिसर के बाहर प्रदर्शन किया।
अधिवक्ताओं ने सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) अतुल कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन पर एक मामले में होस्टाइल गवाह से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से हटकर जिरह कराने और दबाव बनाने का आरोप लगाया।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट ललित तिवारी ने कहा कि सुनवाई के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी है। उन्होंने मामले की जांच कराने और एपीओ को रामनगर से हटाने की मांग की।
बार एसोसिएशन के सचिव एडवोकेट नरेंद्र रावत ने भी एपीओ की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गवाह के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी।
बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। सोमवार को अधिवक्ताओं की बैठक और प्रेस वार्ता प्रस्तावित है, जबकि मंगलवार को मामले को जिला जज और हाईकोर्ट के समक्ष उठाया जाएगा।
हालांकि एपीओ अतुल कुमार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके द्वारा की गई कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और निर्धारित नियमों के अनुरूप थी तथा उन्होंने किसी भी प्रकार की नियमविरुद्ध कार्रवाई नहीं की है।
देहरादून में राष्ट्रीय लोक अदालत रही सफल
वहीं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के तत्वावधान में वर्ष 2026 की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।
जिला जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष हरीश कुमार गोयल की अध्यक्षता में देहरादून, ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, मसूरी और चकराता के न्यायालयों में लोक अदालत आयोजित हुई।
लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस, सिविल और शमनीय आपराधिक मामलों समेत विभिन्न श्रेणियों के मामलों का निस्तारण किया गया। पूरे जनपद में कुल 12,444 मामलों का समाधान हुआ और 30,33,93,475 रुपये की धनराशि पर समझौता संपन्न हुआ।
देहरादून मुख्यालय में 5,541 मामलों का निस्तारण करते हुए करीब 26.49 करोड़ रुपये पर समझौता हुआ। वहीं विकासनगर में 1,316, ऋषिकेश में 557, डोईवाला में 179, मसूरी में 55 और चकराता में 73 मामलों का निस्तारण किया गया।
इसके अलावा प्री-लिटिगेशन स्तर पर भी 6,903 मामलों का सफल निस्तारण हुआ, जिनमें 3.84 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पर पक्षकारों के बीच समझौता कराया गया।
जिला जज हरीश कुमार गोयल ने कहा कि लोक अदालतें सरल, सुलभ और त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम हैं तथा इनके माध्यम से समाज में सौहार्द और संवाद की भावना को बढ़ावा मिलता है।
वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सीमा डुंगराकोटी ने इस उपलब्धि का श्रेय न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और प्राधिकरण की टीम के सामूहिक प्रयासों को दिया।
इस तरह राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन उत्तराखंड में एक ओर रामनगर में न्यायिक तंत्र को लेकर विवाद और विरोध देखने को मिला, तो दूसरी ओर देहरादून में बड़ी संख्या में मामलों के सौहार्दपूर्ण निस्तारण ने लोक अदालत की उपयोगिता को भी रेखांकित किया।


