क्राइम अपडेट: कहीं ‘मृत’ व्यक्ति की लौटी जिंदगी तो कहीं 12 लाख का गबन समेत पांच बड़ी खबरें, पढ़ें….

कहीं ‘मृत’ व्यक्ति की लौटी जिंदगी तो कहीं 12 लाख का गबन समेत पांच बड़ी खबरें, पढ़ें….

देहरादून। उत्तराखंड में गुरुवार को कई अहम घटनाक्रम सामने आए। ऋषिकेश में डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए गए व्यक्ति के अंतिम यात्रा के दौरान कथित तौर पर सांस लेने का चौंकाने वाला मामला सामने आया।

वहीं उत्तराखंड को-ऑपरेटिव बैंक के खाताधारकों से ली गई 12.31 लाख रुपये की रकम बैंक में जमा नहीं करने के आरोप में पुलिस ने दैनिक जमा अभिकर्ता को गिरफ्तार किया है।

देहरादून में सरकारी वेब पोर्टल और एप्लीकेशन का एक्सेस कथित तौर पर बिना अनुमति रेवोक करने के मामले में निजी कंपनी के CEO के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

दूसरी ओर अल्मोड़ा के छानी गांव में 22 दिनों से दहशत बनी मादा तेंदुआ वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई। देहरादून में लोन फ्रॉड की शिकायतों पर प्रशासन ने भी सख्ती दिखाते हुए संदिग्ध मामलों में SIT जांच के निर्देश दिए हैं।

ऋषिकेश में अंतिम यात्रा के दौरान ‘मृत’ व्यक्ति की लौटी सांसें

ऋषिकेश के गीता नगर गली नंबर-5 निवासी साईं राम की तबीयत खराब थी। परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों ने गुर्दे फेल होने और दो बार हार्ट अटैक के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी और मुक्तिधाम सेवा समिति से अंतिम यात्रा वाहन भी बुक किया गया।

जब वाहन शव को लेकर श्यामपुर रेलवे फाटक के पास पहुंचा तो सड़क के गहरे गड्ढे में पहिया जाने से वाहन को जोरदार झटका लगा। परिजनों और समिति से जुड़े लोगों के अनुसार झटके के बाद साईं राम में हलचल हुई, उन्होंने आंखें खोलीं और सांसें चलने लगीं।

इसके बाद अंतिम संस्कार रोक दिया गया और उन्हें उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश ले जाया गया। अब इस मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि डॉक्टरों ने किस चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर उन्हें मृत घोषित किया था और बाद में जीवन के संकेत कैसे दिखाई दिए।

को-ऑपरेटिव बैंक में 12.31 लाख के गबन का आरोप, अभिकर्ता गिरफ्तार

उत्तराखंड को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लक्ष्मणझूला रोड, ऋषिकेश से जुड़े मामले में पुलिस ने दैनिक जमा अभिकर्ता दीपक बढ़ई को गिरफ्तार किया है।

बैंक के सचिव एवं महाप्रबंधक एसएस राणा की शिकायत के अनुसार आरोपी ने अलग-अलग तिथियों में खाताधारकों से खाते में जमा करने के लिए रकम ली, लेकिन उसे बैंक में जमा नहीं कराया। कुल 12,31,458 रुपये के गबन का आरोप है।

शिकायत पर कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमा संख्या 212/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी दीपक बढ़ई पुत्र उमेश बढ़ई, निवासी चंद्रेश्वर नगर, ऋषिकेश, उम्र 29 वर्ष, को 9 सितंबर को उदय बाग, विकासनगर से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ धारा 316(5) BNS के तहत कार्रवाई की गई है।

सरकारी पोर्टल का एक्सेस रेवोक करने पर निजी कंपनी के CEO पर केस

महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज रायपुर के आईटी सेल नोडल अधिकारी आदर्श पंत की शिकायत पर थाना रायपुर पुलिस ने निजी कंपनी के CEO के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

आरोप है कि विभागीय वेब पोर्टल और एप्लीकेशन के निर्माण एवं तकनीकी संचालन का काम कंपनी को दिया गया था और कंपनी को जरूरी क्रेडेंशियल व एक्सेस उपलब्ध कराए गए थे।

आरोप है कि CEO ने विभागीय सहमति और पूर्व सूचना के बिना अलग-अलग एक्सेस रेवोक कर दिए।
पुलिस ने IT Act की धारा 43 और 66 तथा BNS की धारा 324 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

मामले की जांच निरीक्षक राकेश कुमार गुसाईं को सौंपी गई है। संबंधित पोर्टल और एप्लीकेशन के माध्यम से चैंपियनशिप ट्रॉफी, उदयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और डिजिटल यूथ फेस्टिवल जैसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

अल्मोड़ा में 22 दिन से दहशत बनी मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद

भैंसियाछाना ब्लॉक के छानी गांव में पिछले 22 दिनों से ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण बनी मादा तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई।

पिछले महीने तेंदुए ने लगातार दो दिनों में दो ग्रामीणों पर हमला किया था। इसके बाद वन विभाग ने गांव में पिंजरा लगाने के साथ अलग-अलग स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए थे।

करीब एक सप्ताह बाद पिंजरे में तेंदुए का शावक भी कैद हुआ था, जिसे सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। अब मादा तेंदुए को एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है।

हवालबाग के रेंजर मोहन राम आर्या ने बताया कि रेस्क्यू सेंटर में तेंदुए का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और उच्च अधिकारियों के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

लोन फ्रॉड पर प्रशासन सख्त, संदिग्ध मामलों में SIT जांच

देहरादून में ऋण और ऋण बीमा के नाम पर फर्जीवाड़े की शिकायतों को जिलाधिकारी आशीष चौहान ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने NBFC और HFC प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ऋण वितरण प्रक्रिया, एजेंटों की भूमिका, रिकवरी और संदिग्ध मामलों की समीक्षा की।

डीएम ने स्पष्ट किया कि लोगों की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर फर्जी तरीके से लोन दिलाने वाले एजेंटों, बिचौलियों और जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गंभीर और संदिग्ध मामलों में जरूरत के अनुसार SIT जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। सभी NBFC और HFC से वितरित ऋण और लंबित रिकवरी मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

सभी SDM को अपने क्षेत्रों में टास्क फोर्स गठित कर NBFC-HFC, सक्रिय मनीलेंडरों और लोन दिलाने वाले एजेंटों का विवरण जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने वित्तीय संस्थाओं से ऋण वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा है।