लोकायुक्त, हल्द्वानी विवाद और चुनावी रणनीति। सितंबर में गरमाएगा उत्तराखंड का राजनीतिक माहौल
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही संगठन को मजबूत करने के साथ चुनावी जमीन तैयार करने में जुट गई हैं।
एक ओर कांग्रेस ने प्रदेश में नौ साल से लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है, तो दूसरी ओर भाजपा ने आगामी चुनाव को लेकर संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला तेज कर दिया है।
इसी बीच सितंबर में दोनों दलों के राष्ट्रीय नेताओं के उत्तराखंड दौरे से प्रदेश का राजनीतिक माहौल और गरमाने के आसार हैं।
कांग्रेस प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह ने लोकायुक्त की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सरकार बनने के 100 दिन के भीतर लोकायुक्त नियुक्त करने का वादा किया था, लेकिन नौ साल बीतने के बावजूद यह वादा पूरा नहीं हुआ।
कांग्रेस का आरोप है कि जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में अपने मंत्रियों और चहेते अधिकारियों को बचाने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति टाल रही है। राजेंद्र शाह ने लोकायुक्त संस्था के कार्यालय और ढांचे पर खर्च होने वाले सरकारी बजट पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि जब लोकायुक्त का पद ही खाली है तो हर साल दो से तीन करोड़ रुपये का बजट किस वजह से खर्च किया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद सरकार ने मजबूरी में पांच सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया है।
वहीं, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कुंवर जपेंद्र सिंह ने लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी की बात स्वीकार करते हुए सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ जो कार्रवाई होनी थी, वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार खुद कर रही है।
उनके मुताबिक भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और ढाई सौ से अधिक लोगों को जेल भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त के चयन के लिए कमेटी गठित हो चुकी है और प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
2027 की तैयारी में भाजपा, हल्द्वानी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी
विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भाजपा ने संगठनात्मक गतिविधियों को और तेज कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 9 और 10 सितंबर को उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे।
उनका मुख्य कार्यक्रम हल्द्वानी में रहेगा, जहां प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठकें होंगी।
9 सितंबर को नितिन नवीन हल्द्वानी में राज्य कार्यसमिति की बैठक में शामिल होंगे। इसके बाद प्रदेश पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों के साथ बैठक तथा शाम को प्रदेश कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है। इन बैठकों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, आगामी कार्यक्रमों और विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा होगी।
10 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष सेवा संकल्प अभियान की बैठक लेंगे। इसके बाद पूर्व सैनिक सम्मेलन में शामिल होंगे। दोपहर बाद रुद्रपुर में पंजाबी गौरव सम्मेलन में भी प्रतिभाग करेंगे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने नितिन नवीन के दौरे को 2027 के चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य लगातार तीसरी बार सरकार बनाना है और राष्ट्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन चुनावी रणनीति को मजबूती देगा।
सितंबर में कांग्रेस भी झोंकेगी पूरी ताकत
भाजपा के साथ कांग्रेस ने भी सितंबर महीने में उत्तराखंड में अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी की है। कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के मुताबिक सितंबर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई बड़े नेता उत्तराखंड का दौरा कर सकते हैं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं की प्रस्तावित सक्रियता को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी हल्द्वानी के कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद समेत सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सामाजिक सम्मान, संविधान और दलित-ओबीसी-मुस्लिम मतदाताओं से जुड़े मुद्दे चुनावी नैरेटिव को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं भाजपा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को लेकर ज्यादा चिंतित नजर नहीं आ रही है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी का कहना है कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड आने से चुनावी परिणाम पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उनका आरोप है कि कांग्रेस के पास मजबूत संगठनात्मक ढांचा नहीं है।
हल्द्वानी विवाद भी बनेगा सियासी मुद्दा
उत्तराखंड की राजनीति में हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद भी दोनों दलों के बीच टकराव का नया मुद्दा बन गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कि पार्टी वैचारिक लड़ाई को सड़क तक ले जाने के लिए तैयार है।
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए प्रदेश के सभी 19 संगठनात्मक जिलों में अनुसूचित मोर्चे के कार्यकर्ताओं के जरिए सामाजिक सौहार्द संकल्प धरने की बात कही है।
इस तरह लोकायुक्त की नियुक्ति, हल्द्वानी विवाद और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां उत्तराखंड की सियासत के केंद्र में आ गई हैं। सितंबर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की संभावित सक्रियता के बीच दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में उत्तराखंड में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ सड़क से लेकर संगठन तक चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।


