‘शुद्धिकरण’ विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, पीएचडी परीक्षा दोबारा। बेल बाबा याचिका खारिज, बिल्डर को झटका
देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई और फैसले सामने आए। हल्द्वानी रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
वहीं, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को पीएचडी की शेष 20 सीटों के लिए यूजीसी नियमों के अनुसार दोबारा प्रवेश परीक्षा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा के पास हाईकोर्ट स्थानांतरित करने से जुड़ी याचिका खारिज कर दी गई है। देहरादून के चर्चित बिल्डर पुनीत अग्रवाल के जिला बदर मामले में भी हाईकोर्ट ने गढ़वाल कमिश्नर के आदेश पर रोक लगा दी है।
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ मामले में 7 सितंबर को सुनवाई संभव
हल्द्वानी रामलीला मैदान में 8 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद 11 अगस्त को किए गए कथित धार्मिक अनुष्ठान का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है।
देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल का छिड़काव कर मैदान का ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
याचिका में इस घटना से सामाजिक वैमनस्य पैदा होने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा राज्य सरकार को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।
मामले में आगामी 7 सितंबर को सुनवाई होने की संभावना है। कांग्रेस इस मामले में कार्रवाई और एफआईआर की मांग कर रही है, जबकि भाजपा कांग्रेस पर मामले को जातिगत रंग देने का आरोप लगा रही है।
पीएचडी की 20 सीटों पर दोबारा परीक्षा
उत्तराखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दीपक चंद्र उप्रेती की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अहम आदेश दिया।
विश्वविद्यालय ने इतिहास विषय की शेष 20 सीटों के लिए यूजीसी नियमावली 2022 के अनुसार दोबारा प्रवेश परीक्षा कराने पर सहमति जताई है।
मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 50 प्रतिशत प्रश्न रिसर्च मैथडोलॉजी और 50 प्रतिशत संबंधित विषय से होने चाहिए, लेकिन विश्वविद्यालय की परीक्षा में सभी प्रश्न इतिहास विषय से पूछे गए थे।
कोर्ट ने इस तर्क को प्रथम दृष्टया सही माना। विश्वविद्यालय द्वारा नई परीक्षा कराने पर सहमति जताने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए अविलंब नियमानुसार परीक्षा कराने के निर्देश दिए।
लॉ कॉलेजों को अभ्यावेदन का मौका
चमन लाल लॉ कॉलेज रुड़की समेत सिद्धार्थ लॉ कॉलेज, अमृत लॉ कॉलेज, जीवन रेखा कॉलेज, इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज और डॉक्टर रतन लाल हिमालयन कॉलेज की संबद्धता से जुड़ी याचिकाओं का भी हाईकोर्ट ने निस्तारण कर दिया।
कोर्ट ने कॉलेजों को संबंधित विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता दी है।
अदालत ने कहा कि यदि 8 सितंबर 2026 तक अभ्यावेदन दिया जाता है तो विश्वविद्यालय को दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार उस पर निर्णय लेना होगा।
कॉलेजों ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 और 2026-27 के लिए संबद्धता नहीं मिलने तथा बीसीआई की मंजूरी के लिए आवेदन में आ रही दिक्कतों को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट को बेल बाबा स्थानांतरित करने की याचिका खारिज
नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा के पास हाईकोर्ट स्थानांतरित करने और प्रस्तावित भूमि को लेकर दाखिल याचिका को खंडपीठ ने खारिज कर दिया है।
याचिकाकर्ताओं का दावा था कि प्रस्तावित भूमि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में आती है और इसके इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक है। साथ ही क्षेत्र को हाथी कॉरिडोर का हिस्सा बताते हुए वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया गया था।
राज्य सरकार ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि प्रस्तावित स्थान हाथी कॉरिडोर में नहीं आता और हाईकोर्ट स्थानांतरण की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है।
सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की बात कही है।
पुनीत अग्रवाल के जिला बदर मामले में कमिश्नर के आदेश पर रोक
देहरादून की एटीएस कॉलोनी में कथित गुंडागर्दी के मामले में बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई से जुड़ा मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा है।
जिला मजिस्ट्रेट ने मई 2026 में उन्हें छह महीने के लिए जिला बदर किया था। बाद में गढ़वाल कमिश्नर ने जुलाई में डीएम के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए डीएम के पास भेज दिया था।
अब हाईकोर्ट ने कमिश्नर के इस आदेश के संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने 3 सितंबर को यह आदेश दिया।
अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि उत्तर प्रदेश नियंत्रण गुंडा अधिनियम, 1970 की धारा 6 में अपीलीय प्राधिकारी को मामले को दोबारा निर्णय के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास रिमांड करने की शक्ति नहीं दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होगी।
पुनीत अग्रवाल के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई के पीछे एटीएस कॉलोनी में मारपीट, धमकी, हथियार के कथित प्रदर्शन समेत कई शिकायतों और मुकदमों का हवाला दिया गया था।
वहीं, हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने कमिश्नर के रिमांड आदेश की वैधानिकता को चुनौती दी है। अदालत की अंतरिम रोक के बाद अब इस मामले में अगली सुनवाई पर कानूनी स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


