GST रेड, छात्रा मौत की जांच, चीनी पर छापेमारी और मदरसा सील समेत कई बड़ी खबरें, पढ़ें….
देहरादून। उत्तराखंड में बुधवार को अलग-अलग मामलों को लेकर प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई सामने आई। राज्य कर विभाग ने रियल एस्टेट सेक्टर में जीएसटी चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के कथित दुरुपयोग के खिलाफ चार शहरों में एक साथ छापेमारी की।
वहीं, भरसार विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत के मामले में जांच समिति गठित की गई है। देहरादून में चीनी की बढ़ती कीमतों पर प्रशासन ने छापेमारी अभियान चलाया, जबकि बाजपुर में प्रशासन ने एक मदरसे को सील कर दिया।
रियल एस्टेट सेक्टर पर GST विभाग का शिकंजा, 7.43 करोड़ रुपये जमा
राज्य कर विभाग ने देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों पर एक साथ कार्रवाई की। राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर 16 टीमों में शामिल 55 अधिकारियों ने विभिन्न फर्मों के व्यावसायिक परिसरों की जांच की।
कार्रवाई के दौरान कई फर्मों ने अपनी कर देयता स्वीकार करते हुए 7.43 करोड़ रुपये मौके पर ही जमा कराए। टीमों ने बिक्री, खरीद, भुगतान, निर्माण कार्य और टैक्स से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं।
विभाग अब इन दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर वास्तविक कर देयता का आकलन करेगा। जांच में अतिरिक्त कर चोरी, गलत आईटीसी क्लेम या अन्य अनियमितता सामने आने पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।
फ्लैट की रकम पहले, रजिस्ट्री बाद में—GST बचाने की आशंका
जांच में रियल एस्टेट कारोबार में कर देयता कम करने के कथित तौर-तरीकों पर भी फोकस किया गया है। विभाग यह देख रहा है कि कहीं फ्लैट की रकम खरीदारों से पहले लेकर बिक्री को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद दिखाने का प्रयास तो नहीं किया गया।
ऐसे मामलों में विभाग खरीदार से रकम प्राप्त होने की तारीख, बिक्री और रजिस्ट्री की तारीख तथा कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने की तारीख का मिलान कर रहा है।
अपनी ही निर्माण फर्म बनाकर ITC लेने का भी शक
जांच का दूसरा प्रमुख पहलू बिल्डरों द्वारा अपनी या संबंधित निर्माण फर्मों के माध्यम से परियोजनाओं का निर्माण कराने से जुड़ा है।
विभाग ऐसे मामलों की भी पड़ताल कर रहा है, जहां निर्माण फर्मों से खरीद दर्शाकर आईटीसी का दावा किया गया।
अब बिल, भुगतान, वास्तविक आपूर्ति, निर्माण कार्य और आईटीसी क्लेम का मिलान किया जा रहा है। करीब 15 दिनों तक जुटाई गई कारोबारी सूचनाओं और उनके विश्लेषण के बाद चार शहरों में एक साथ यह कार्रवाई की गई।
भरसार विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत, 15 दिन में जांच रिपोर्ट
पौड़ी गढ़वाल: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार में बीएससी हॉर्टिकल्चर चतुर्थ वर्ष की छात्रा की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
छात्रों के विरोध और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है।
कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने कहा कि जांच समिति 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उन्होंने परिसर में एक चिकित्सक की नियुक्ति करने और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने 50 लाख रुपये मुआवजा देने, परिसर में 24 घंटे डॉक्टर और नर्स उपलब्ध कराने, चार एंबुलेंस की व्यवस्था करने, पैथोलॉजी लैब स्थापित करने और नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने समेत कई मांगें रखीं।
छात्रों का आरोप है कि परिसर में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे पाबौ, फिर पौड़ी और श्रीनगर होते हुए ऋषिकेश ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद विश्वविद्यालय में शोकसभा तक आयोजित नहीं की गई। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद प्रशासन ने कई मांगों पर विचार और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
चीनी के बढ़ते दामों पर प्रशासन सख्त, थोक विक्रेताओं पर छापेमारी
देहरादून: बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर जिला प्रशासन ने संयुक्त निरीक्षण और छापेमारी अभियान शुरू किया है।
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल के नेतृत्व में देहरादून, विकासनगर, सहसपुर और ऋषिकेश में दो दर्जन से अधिक थोक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों की जांच की गई।
अधिकारियों ने चीनी का स्टॉक, बिक्री अभिलेख, खरीद-बिक्री का विवरण और बाजार में प्रचलित कीमतों की जांच की। प्रशासन ने जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
प्रशासन के मुताबिक पिछले दिनों चीनी की कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, लेकिन अभियान के बाद अब बाजार में इसकी कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलो तक आ गई है।
जिला पूर्ति अधिकारी ने व्यापारियों को स्टॉक और बिक्री का रिकॉर्ड नियमानुसार रखने तथा उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
बाजपुर में मदरसा सील, संचालक ने उठाए सवाल
रुद्रपुर: ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर में प्रशासन ने मदरसा जामिया हनफिया रज़ाउल उलूम को सील कर दिया। राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की।
मदरसा संचालक इरशाद अली ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मदरसे के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी थी और निर्धारित शुल्क भी जमा किया गया था।
उनका कहना है कि टीम को आवेदन से जुड़े दस्तावेज और शुल्क जमा करने की रसीद भी दिखाई गई, लेकिन इसके बावजूद मदरसे को सील कर दिया गया।
संचालक के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन को लेकर हुई बैठक में मदरसों को पंजीकरण कराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिए जाने की जानकारी दी गई थी। इसी आधार पर उन्होंने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया है।
फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद मदरसा सील है। पूरे मामले में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सीलिंग की कार्रवाई किस आधार पर की गई और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का इस पर क्या प्रभाव था।
इस पूरे मामले में अब प्रशासनिक कार्रवाई के आधार, मदरसा संचालक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित नियमों की स्थिति पर सबकी नजर है।


