बारिश का रौद्र रूप! 179 सड़कें बंद, 12 से ज्यादा मौतें
- नैनीताल में 47 मार्ग बाधित, नदियां उफान पर, ग्लेशियरों के पिघलने से बढ़ा खतरा
देहरादून। उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश ने पहाड़ से मैदान तक जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन, मलबा और जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
राज्य में अलग-अलग बारिश जनित हादसों में 12 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। नैनीताल में 47 समेत प्रदेशभर में 179 सड़कें बंद हैं। कई नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
नैनीताल में 47 सड़कें बंद, 217 मिमी तक बारिश
नैनीताल जिले में भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 2 सितंबर सुबह 9:30 बजे की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 47 सड़कें बाधित हैं। इनमें तीन राज्य मार्ग, दो मुख्य जिला मार्ग, एक अन्य जिला मार्ग और 41 ग्रामीण मार्ग शामिल हैं।
गर्जिया-बेतालघाट-खैरना, खनस्यू-पतलोट और काठगोदाम-सिमलियाबैड समेत कई प्रमुख मार्ग प्रभावित हैं। नौकुचियाताल-जंगलीयागांव, रातीघाट-बुधलाकोट, मंगोली-थापला और पंगोट-देचौरी समेत कई ग्रामीण मार्ग भी बंद हैं।
बीते 24 घंटे में नैनीताल स्नो व्यू में 217 मिमी, हल्द्वानी-काठगोदाम में 166 मिमी, कैंची धाम में 105 मिमी तथा मुक्तेश्वर और चोरगलिया में 107.7 मिमी बारिश दर्ज की गई।
गौला-कोसी समेत कई नदियां उफान पर
भारी बारिश के कारण गौला, कोसी और नंधौर नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। सुबह 9:30 बजे तक दर्ज डिस्चार्ज के अनुसार गौला नदी में 18,612 क्यूसेक, कोसी में 25,068 क्यूसेक और नंधौर में 1,058 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया।
कैंची धाम में शिप्रा नदी और रामनगर में कोसी-दाबका नदी तेज बहाव में हैं। नैनी झील का जलस्तर 88 फीट पार होने के बाद चैनल खोल दिए गए हैं।
गर्जिया मंदिर में श्रद्धालुओं की एंट्री बंद
कोसी नदी का पानी गर्जिया देवी मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंचने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया है। मंदिर समिति के मुताबिक नदी का जलस्तर सामान्य होने के बाद ही मंदिर को दोबारा खोला जाएगा। प्रशासन ने कोसी नदी के आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
नैनीताल में दर्जनों मकानों पर भूस्खलन का खतरा
तल्लीताल के मल्ला कृष्णापुर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण मकानों के नीचे की जमीन खिसक रही है। बरसाती पानी के तेज बहाव से खेत, पेड़ और बिजली का पुराना खंभा भी भूस्खलन की चपेट में आ गए। कई मकानों की नींव के नीचे जमीन लगातार कट रही है।
प्रशासन ने मौके का निरीक्षण कर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी है। स्थानीय लोगों ने मकानों को बचाने के लिए तत्काल ठोस सुरक्षा कार्य कराने की मांग की है।
20 परिवार मवेशियों समेत सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट
नैनीताल तहसील के अल्चौना-पांडेछोड़ क्षेत्र में ककड़िया नाले में पानी और मलबा बढ़ने से घरों और गौशालाओं को खतरा पैदा हो गया। इसके बाद 20 प्रभावित परिवारों को उनके मवेशियों समेत गांव में ही सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया गया है।
जिले में अब तक 54 भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त और एक भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।
देहरादून में दो बच्चों की मौत
देहरादून में बारिश के बीच नाले और नहर में बहने से दो बच्चों की मौत हो गई। पटेलनगर क्षेत्र में भारतीय वन्यजीव संस्थान परिसर से लापता 12 वर्षीय बच्चे का शव बडोवाला के पास डीएसपी चौक की बरसाती नदी से बरामद किया गया। आशंका है कि बच्चा तेज बहाव में बहकर यहां तक पहुंचा।
वहीं रायपुर क्षेत्र के बालावाला में 10 वर्षीय बच्चा नहर में गिर गया था। रातभर चले सर्च ऑपरेशन के बाद एसडीआरएफ ने उसका शव बरामद किया।
विकासनगर में भी भारी जलभराव के बीच एक मकान में फंसे पांच लोगों को पुलिस ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
अल्मोड़ा में पांच की मौत, अन्य जिलों में भी हादसे
बारिश के दौरान अल्मोड़ा में मकान में मलबा घुसने से मां और दो बच्चों समेत पांच लोगों की मौत हुई। पौड़ी के कोटद्वार में कोल्हू नदी में बाइक समेत बहने से महिला और उसकी एक साल की बेटी की मौत हो गई। पैठाणी में पश्चिमी नयार नदी में बहने से एक महिला की जान चली गई।
देहरादून के प्रेमनगर में बरसाती रपटे में दो कारों के बहने से दो लोगों की मौत हुई, जबकि उत्तरकाशी में झील से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया।
प्रदेश में 179 सड़कें बंद
बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेशभर में दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 179 सड़कें बंद हैं। इनमें अल्मोड़ा में 23, बागेश्वर में 11, चमोली में 17, चंपावत में 2, देहरादून में 15, नैनीताल में 47, पौड़ी में 12, पिथौरागढ़ में 12, रुद्रप्रयाग में 11, टिहरी में 15 और उत्तरकाशी में 14 मार्ग शामिल हैं।
प्रशासन और संबंधित विभाग जेसीबी तथा अन्य संसाधनों की मदद से बंद मार्गों को खोलने में जुटे हैं।
टिहरी के बौराड़ी में भूस्खलन, कई मकान खतरे में
नई टिहरी के बौराड़ी सेक्टर-8 डी में बुधवार सुबह मकान के समीप बड़ा भूस्खलन हो गया।
घर के नीचे बना पुश्ता भरभराकर ढह गया और भारी मलबा नीचे आ गया। वहां खड़ी स्कूटी भी मलबे में दब गई। गनीमत रही कि घटना के समय कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया।
कई मकानों पर खतरा देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा है। जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने उपचारात्मक कार्य जल्द शुरू कराने की बात कही है।
अल्मोड़ा समेत पांच जिलों में स्कूल बंद
भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए 2 सितंबर को चंपावत, पिथौरागढ़, नैनीताल, अल्मोड़ा और बागेश्वर में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखे गए।
वहीं अल्मोड़ा में 3 सितंबर को भी कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों के साथ कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
गौला पुल पर फोटो-वीडियोग्राफी से बचने की अपील
काठगोदाम गौला पुल और आसपास पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस ने लोगों से नदी और पुल के आसपास अनावश्यक रूप से जाने तथा फोटो-वीडियोग्राफी या रील बनाने से बचने को कहा है।
एसएसपी नैनीताल ने गौला पुल काठगोदाम और बनभूलपुरा का निरीक्षण कर पुलिस और एसडीआरएफ को अलर्ट रहने के निर्देश दिए।
पुलिस ने चेताया है कि नदी या सड़क पर तेज बहाव के बीच वाहन निकालने की कोशिश न करें, क्योंकि पानी की गहराई और बहाव का अनुमान लगाना मुश्किल होता है।
ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने ने बढ़ाई भविष्य की चिंता
बारिश के मौजूदा संकट के बीच वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने हिमालयी ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव को लेकर भी चिंता जताई है।
भिलंगना घाटी के छह ग्लेशियरों पर करीब पांच दशक के आंकड़ों से तैयार अध्ययन में ग्लेशियरों के द्रव्यमान में लगातार कमी सामने आई है।
खतलिंग ग्लेशियर का पांच किलोमीटर से अधिक पीछे हटना, हाल के वर्षों में बर्फ की हानि बढ़ना और नई ग्लेशियल झील का विकसित होना हिमालय में तेजी से हो रहे बदलाव के संकेत माने जा रहे हैं।
वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष मेहता के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। भारी बारिश से ग्लेशियल झीलों में पानी तेजी से बढ़ सकता है।
उनके मुताबिक पहले जिस झील को भरने में करीब छह महीने लगते थे, अब कुछ परिस्थितियों में वह लगभग एक सप्ताह में भर सकती है, जिससे झील टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की लगातार उपग्रह आधारित और मैदानी निगरानी, जोखिम मैपिंग तथा समय रहते चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है।
हालांकि छोटी सुप्राग्लेशियल झीलों को फिलहाल तत्काल बड़े खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा है और प्रत्येक झील का जोखिम उसके स्थानीय भूगोल, हिमनदीय और जलवैज्ञानिक परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग आंका जाना जरूरी है।
अगले तीन दिन भी बारिश से राहत नहीं
मौसम विभाग के अनुसार 3 सितंबर को देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल, चंपावत, ऊधम सिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश का येलो अलर्ट है।
4 सितंबर को नैनीताल, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार और बागेश्वर तथा 5 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों से दूरी बनाए रखने, तेज बहाव वाले रास्तों को पार न करने, अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। साथ ही जोखिम भरे स्थानों पर रील या फोटो बनाने से भी बचने को कहा गया है।


