उत्तराखंड में बारिश का रौद्र रूप:!अल्मोड़ा में 5 की मौत, पिथौरागढ़ में 17 सड़कें बंद, इन जिलों में स्कूल बंद
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून लगातार आफत बरसा रहा है। भारी बारिश के चलते पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, मलबा आने और नदी-नालों के उफान पर आने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
अल्मोड़ा में बारिश से जुड़ी दो अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई है। पिथौरागढ़ में भूस्खलन के कारण 17 सड़कें बंद हुईं और सैकड़ों वाहन फंस गए। वहीं, नैनीताल के रामनगर में तेज बहाव के बीच एक थ्री-व्हीलर बह गया, हालांकि चालक और यात्री को सुरक्षित बचा लिया गया।
मौसम के बिगड़े हालात को देखते हुए नैनीताल, अल्मोड़ा और बागेश्वर में 2 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
अल्मोड़ा में बारिश बनी काल, दो हादसों में पांच की मौत
अल्मोड़ा जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच अलग-अलग आपदा की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई। सोमेश्वर विकासखंड के वडयूड़ा गांव में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण मकान में मलबा घुस गया था, जिसमें तीन लोगों की दबकर मौत हो गई।
इसके बाद धार की तूनी क्षेत्र में टिन शेड की दीवार ढहने से उसके नीचे दबकर दो नेपाली श्रमिकों की जान चली गई। बताया गया कि कई घंटों से लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी से मलबा नीचे आया और इसकी चपेट में आने से टिन शेड ढह गया। दोनों श्रमिक उस समय शेड के अंदर सो रहे थे।
घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी अंशुल सिंह और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विनीत पाल समेत राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचा। मलबा हटाकर दोनों श्रमिकों को निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
लगातार बारिश से जिले में कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से सड़कें बाधित हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
पिथौरागढ़ में 17 सड़कें बंद, 400 से ज्यादा वाहन फंसे
पिथौरागढ़ जिले में भी सोमवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भूस्खलन के कारण पिथौरागढ़-घाट एनएच समेत 17 सड़कें प्रभावित हुईं। पिथौरागढ़-घाट मार्ग पर मुन्ना बैंड के पास भारी मलबा आने से दोनों ओर 200 से ज्यादा टैक्सी, बस और ट्रक समेत 400 से अधिक वाहन फंस गए।
हालांकि, देर शाम पिथौरागढ़-घाट सड़क को यातायात के लिए खोल दिया गया। वहीं, थल-मुनस्यारी और थल-ओगला स्टेट हाईवे भी भूस्खलन के कारण बंद रहे।
मलघाट में मलबा आने से धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-गुंजी बॉर्डर रोड भी बाधित हो गई। इससे चीन सीमा की ओर जाने वाली तीन घाटियों का संपर्क प्रभावित हुआ है। बीआरओ की टीमें मार्ग खोलने में जुटी हैं।
जिले की कई ग्रामीण सड़कें अभी भी बंद हैं, जिनमें ड्योड़ा-बारमो, कनालीछीना-पीपली, सोबला-उमचिया, होकरा-नामिक, ऐलागाड़-जुम्मा, धापा बैंड-बुईं पातो, बांसबगड़-कोटा, बांसबगड़-धामीगांव, कालिका-खुमती, देवीसूना-गराली, मालाकोट-लोद और सेलाकोट-बुसैल मार्ग शामिल हैं।
लगातार बारिश के कारण काली, रामगंगा, सरयू और गोरी नदियों का जलस्तर भी सामान्य से अधिक है। प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।
रामनगर में उफनते नाले में बहा थ्री-व्हीलर
नैनीताल के रामनगर में टेड़ा गांव का बरसाती नाला तेज बारिश के बाद उफान पर आ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
इसी दौरान सामान और एक यात्री को लेकर जा रहा थ्री-व्हीलर तेज बहाव के बीच नाला पार करने लगा। अचानक पानी का दबाव बढ़ने से वाहन संतुलन खो बैठा और बहने लगा। यात्री ने समय रहते वाहन से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई।
चालक भी तेज बहाव में फंस गया, जिसे स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। प्रशासन और पुलिस ने लोगों से ऐसे उफनते नालों और नदी-पुलों को पार न करने की अपील की है।
नैनीताल, अल्मोड़ा और बागेश्वर में 2 सितंबर को स्कूल बंद
मौसम विभाग के भारी बारिश के पूर्वानुमान और ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए नैनीताल, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिला प्रशासन ने 2 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। इन जिलों में सभी आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे।
नैनीताल में जिला प्रशासन ने बताया कि भारी बारिश के साथ गरज-चमक, आकाशीय बिजली, जलभराव, भूस्खलन और कुछ क्षेत्रों में बादल फटने जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। नैनीताल शहर में परिसर में ही आवासीय और शैक्षणिक सुविधा देने वाले आवासीय संस्थानों पर यह आदेश लागू नहीं होगा।
अल्मोड़ा प्रशासन ने भी आपात बैठक कर अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील मार्गों पर जेसीबी तैनात रखने, अस्पतालों और एंबुलेंस सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखने तथा भू-कटाव और खुदाई वाले निर्माण कार्य तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
अगले 18 घंटे बेहद अहम, नैनीताल-अल्मोड़ा में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 1 सितंबर शाम से 2 सितंबर सुबह तक नैनीताल और अल्मोड़ा के कई क्षेत्रों में बहुत भारी से अत्यंत भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है।
चौखुटिया, भिकियासैंण, रानीखेत, भनोली, कटारमल, जैती, रामनगर, भीमताल, हल्द्वानी, मुक्तेश्वर, कोटाबाग, भवाली और द्वाराहाट समेत आसपास के इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने, नदी-नालों और निचले इलाकों से दूर रहने, जलभराव वाली सड़कों पर वाहन न चलाने और बिजली के तारों व टूटे पेड़ों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।
ग्लेशियर झीलों पर भी निगरानी, अर्ली वार्निंग सिस्टम की तैयारी
उत्तराखंड में लगातार बढ़ते बारिश और आपदा के खतरे के बीच संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि झील के आसपास होने वाली छोटी घटना नीचे की ओर आते-आते बड़ी आपदा का रूप ले सकती है। ऐसे में केवल झील के पास ही नहीं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों के बीच भी चेतावनी प्रणाली विकसित करना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार झीलों के अध्ययन के जरिए बेसलाइन डाटा तैयार किया जाएगा, ताकि भविष्य में वहां आवश्यक उपकरण लगाए जा सकें और संभावित आपदा की सूचना समय रहते नीचे बसे क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सके।


