क्राइम अपडेट: पौड़ी में CM पर पोस्ट का केस, ऋषिकेश में गैंगस्टर कार्रवाई, नैनीताल में 378 संदिग्ध सिम चिन्हित

पौड़ी में CM पर पोस्ट का केस, ऋषिकेश में गैंगस्टर कार्रवाई, नैनीताल में 378 संदिग्ध सिम चिन्हित

देहरादून। उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था, सोशल मीडिया विवाद, संगठित अपराध, साइबर ठगी और नशे के खिलाफ एक साथ कई मोर्चों पर कार्रवाई ने सोमवार को सुर्खियां बटोरीं।

पौड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक और आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

वहीं, खुद को कथित तौर पर ‘किंग ऑफ उत्तराखंड’ बताकर दबदबा बनाने वाले गैंग पर देहरादून पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट का शिकंजा कसते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

नैनीताल पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध 378 सिम और 361 IMEI नंबर चिन्हित किए हैं, जबकि देहरादून के थानी गांव में नशे के बढ़ते कथित कारोबार से परेशान महिलाएं खुद लाठी-डंडे लेकर रात में पहरा दे रही हैं।

CM धामी को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट पर आशुतोष नेगी के खिलाफ केस

पौड़ी कोतवाली में उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य राजेश सिंह राजा कोली की तहरीर के आधार पर आशुतोष नेगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नेगी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कथित तौर पर नेपाली मूल का बताया और इसके समर्थन में कोई तथ्य या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। तहरीर में पोस्ट में जाति और धर्म से जुड़े कथित आपत्तिजनक संदर्भों पर भी आपत्ति जताई गई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह की सामग्री लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकती है और सामाजिक वैमनस्य की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवादित पोस्ट, उसके मूल स्रोत, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि पोस्ट किसने तैयार और साझा की, उसमें किए गए दावों का आधार क्या था और उसके प्रसार का सामाजिक प्रभाव कितना पड़ा।

आशुतोष नेगी इससे पहले भी कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे हैं। मार्च 2024 में एक अलग मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी। पुलिस ने उस समय स्पष्ट किया था कि वह मामला अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित नहीं था।

अब मुख्यमंत्री को लेकर कथित टिप्पणी के नए मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद नेगी एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

‘किंग ऑफ उत्तराखंड’ का दावा करने वाले गैंग पर गैंगस्टर एक्ट

उधर देहरादून पुलिस ने कथित तौर पर लोगों पर दबदबा बनाने, विवादों में जबरन दखल देने, धमकी और ब्लैकमेलिंग के जरिए वसूली करने वाले एक गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गैंग लीडर जगजीत सिंह उर्फ जग्गा समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि नामजद एक अन्य आरोपी रवि गुप्ता की तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार, गिरोह भूमि और पारिवारिक विवादों में दखल देकर लोगों को डराने-धमकाने, मारपीट करने तथा फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कथित वसूली और ब्लैकमेलिंग जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। आरोप है कि गैंग के सदस्य लोगों के घरों में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी भी देते थे।

पुलिस के मुताबिक, जगजीत सिंह और उसके साथियों के खिलाफ वर्ष 2016 से 2026 के बीच करीब 11 आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं। लगातार आपराधिक गतिविधियों और लोगों में कथित तौर पर पैदा हो रहे भय के माहौल को देखते हुए सक्षम न्यायालय से आवश्यक अनुमोदन के बाद कोतवाली ऋषिकेश में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जग्गा की निशानदेही पर उसके घर से ‘किंग ऑफ उत्तराखंड’ लिखा एक बोर्ड भी बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि इसका इस्तेमाल कथित तौर पर अपना प्रभाव और दबदबा दिखाने के लिए किया जाता था। पुलिस फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

साइबर ठगों के नेटवर्क पर नैनीताल पुलिस की नजर, 378 सिम और 361 IMEI चिन्हित

नैनीताल में बढ़ते साइबर अपराध के बीच पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों पर बड़ी तकनीकी कार्रवाई शुरू की है। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी के निर्देश पर साइबर टीम, एसओजी और थाना पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर 378 संदिग्ध सिम कार्ड और 361 IMEI नंबर चिन्हित किए हैं। पुलिस इन कनेक्शनों को बंद कराने की प्रक्रिया में जुटी है।

पुलिस के अनुसार, जांच में इन नंबरों के साइबर अपराध और धोखाधड़ी से जुड़ी गतिविधियों में इस्तेमाल होने के संकेत मिले हैं। कार्रवाई का उद्देश्य साइबर ठगों के नेटवर्क को कमजोर करना और भविष्य में इन मोबाइल कनेक्शनों के जरिए होने वाली ठगी को रोकना है।

नैनीताल पुलिस ने आम लोगों से OTP, ATM या डेबिट कार्ड की जानकारी, CVV, पासवर्ड और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति से साझा नहीं करने की अपील की है।

साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करने और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को तत्काल सूचना देने की सलाह दी गई है।

थानी गांव में महिलाओं ने संभाली रात की चौकीदारी

राजधानी देहरादून के राजपुर थाना क्षेत्र के ओल्ड मसूरी रोड स्थित थानी गांव में एक अलग तस्वीर सामने आई है। नशे के बढ़ते कथित कारोबार और रात में संदिग्ध लोगों की आवाजाही से परेशान गांव की 30 से 35 महिलाएं अब खुद लाठी-डंडे लेकर सड़कों पर निगरानी कर रही हैं।

करीब 350 परिवारों वाले गांव में महिलाओं का कहना है कि बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

महिलाओं के अनुसार उनकी ड्यूटी शाम करीब 5 बजे शुरू होती है और रात 12 बजे तक चलती है। किसी बाहरी व्यक्ति या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर महिलाएं एक-दूसरे को फोन कर मौके पर पहुंचती हैं और पूछताछ करती हैं।

स्थानीय महिला सुधा का दावा है कि पिछले छह-सात वर्षों में गांव में नशे से जुड़ी गतिविधियां बढ़ी हैं और कई अनजान लोग रात में गांव में आते-जाते हैं।

हालांकि, राजपुर थाना प्रभारी पीड़ी भट्ट ने इस मामले में अलग पक्ष रखा है। उनके अनुसार थानी गांव में मंदिर को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा है और गांव के लोग सपेरा बस्ती के लोगों को मंदिर में दर्शन करने से रोक रहे हैं।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक नशे का मुद्दा बनाकर बस्ती के लोगों को रोके जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति को लेकर पुलिस जांच और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पुलिस से शिकायत के बाद कुछ समय के लिए पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई, लेकिन बाद में नियमित गश्त नहीं हुई। स्थानीय सुनीता शर्मा के अनुसार अभियान में शामिल महिलाओं को कथित तौर पर धमकियां भी मिल रही हैं और वे पुलिस से सुरक्षा की मांग कर रही हैं।

महिलाएं अब जिलाधिकारी से मिलकर गांव में नियमित पुलिस गश्त, नशे के कथित कारोबार पर कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करेंगी।

उत्तराखंड में एक ही दिन सामने आए ये मामले राज्य के सामने अलग-अलग किस्म की कानून-व्यवस्था की चुनौतियों की तस्वीर पेश करते हैं। कहीं सोशल मीडिया पर पहचान और सामाजिक टिप्पणियों को लेकर कानूनी कार्रवाई हो रही है, कहीं कथित संगठित अपराध और दबंगई के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाया जा रहा है।

साइबर ठगों के तकनीकी नेटवर्क पर पुलिस की नजर है तो दूसरी ओर राजधानी के एक गांव में महिलाएं अपनी सुरक्षा और बच्चों के भविष्य की चिंता में खुद रात की चौकीदारी कर रही हैं। इन सभी मामलों में आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर अब नजर रहेगी।