बिग ब्रेकिंग: आदि शंकराचार्य मंदिर की सुरक्षा पर हाईकोर्ट की सख्ती, हल्द्वानी हत्याकांड के आरोपी पार्षद की जमानत खारिज

आदि शंकराचार्य मंदिर की सुरक्षा पर हाईकोर्ट की सख्ती, हल्द्वानी हत्याकांड के आरोपी पार्षद की जमानत खारिज

  • टीएचडीसी से चार सप्ताह में शपथ पत्र तलब, प्राचीन मंदिर के आसपास सुरक्षा उपायों के निर्देश; अमित बिष्ट को राहत देने से हाईकोर्ट का इनकार

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए एक ओर पौड़ी गढ़वाल स्थित आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़े प्राचीन मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, वहीं हल्द्वानी हत्याकांड के आरोपी पार्षद एवं होटल व्यवसायी अमित बिष्ट की जमानत याचिका खारिज कर दी।

आदि शंकराचार्य मंदिर की सुरक्षा पर कोर्ट सख्त

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पौड़ी गढ़वाल के हाट गांव स्थित प्राचीन मंदिर से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए संस्कृति विभाग की निरीक्षण रिपोर्ट का संज्ञान लिया।

रिपोर्ट में बताया गया कि 16 अक्टूबर 2025 को क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, पौड़ी द्वारा किए गए निरीक्षण में मंदिर के उत्तरी हिस्से में मलबा रोकने के लिए अतिरिक्त आरसीसी सुरक्षा दीवार बनाने, पूर्वी दिशा में संचालित क्रशर मशीन को हटाने तथा मंदिर के 100 मीटर दायरे को पूरी तरह खाली रखने की सिफारिश की गई थी, ताकि ऐतिहासिक धरोहर को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके।

यह जनहित याचिका वर्ष 2022 में ग्राम सभा की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि टीएचडीसी के कार्यों से निकलने वाला मलबा मंदिर क्षेत्र के आसपास डाला जा रहा है, जिससे मंदिर और आसपास की पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान टीएचडीसी की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि आरसीसी सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जाएगा। वहीं क्रशर हटाने और 100 मीटर क्षेत्र खाली कराने के संबंध में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने टीएचडीसी को चार सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर अब तक की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

हल्द्वानी हत्याकांड में आरोपी पार्षद को नहीं मिली राहत

एक अन्य मामले में न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने हल्द्वानी के पार्षद एवं होटल व्यवसायी अमित बिष्ट की जमानत याचिका खारिज कर दी।

मामला 5 जनवरी 2026 का है, जब कैनाल रोड स्थित आरोपी के घर के बाहर पहुंचे नितिन लोहानी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अमित बिष्ट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पूर्व में होटल में हुई हिंसा और धमकियों के कारण आरोपी ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मृतक एवं उसका साथी निहत्थे थे तथा उन्होंने घर में घुसने का कोई प्रयास नहीं किया था।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि आत्मरक्षा का अधिकार निहत्थे व्यक्तियों पर गोली चलाने का लाइसेंस नहीं हो सकता। राज्य सरकार ने मामले को गंभीर अपराध बताते हुए जमानत का विरोध किया। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।