बारिश का कहर! मसूरी हाईवे क्षतिग्रस्त, चीन सीमा का संपर्क टूटा, 27 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मानसूनी बारिश अब प्रदेशभर में आफत बन गई है। मसूरी-देहरादून मार्ग पर बड़ा भूस्खलन होने से सड़क धंस गई, पिथौरागढ़ में चीन सीमा को जोड़ने वाली सामरिक सड़क विशाल चट्टान गिरने से बंद हो गई और मौसम विभाग ने 27 जुलाई तक कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
लगातार बारिश के कारण राज्यभर में सड़कें बाधित हो रही हैं, नदियां-नाले उफान पर हैं और प्रशासन ने लोगों से बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।
पर्यटन नगरी मसूरी के पानी वाले मोड़ पर भारी भूस्खलन के चलते सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया। हालात इतने गंभीर हो गए कि प्रशासन को मसूरी-देहरादून मार्ग पूरी तरह बंद करना पड़ा।
लोक निर्माण विभाग ने दिन-रात मलबा हटाकर छोटे वाहनों के लिए वन-वे व्यवस्था के तहत मार्ग बहाल किया, लेकिन सड़क खुलते ही लंबा जाम लग गया।
कई वाहन चालक डेढ़ से दो घंटे तक सड़क पर फंसे रहे। संकरी सड़क और अव्यवस्थित यातायात के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इस घटना ने सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष आपदा के बाद इस स्थान पर लाखों रुपये खर्च कर सड़क और सुरक्षा कार्य कराए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में सड़क धंस गई।
लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का यह भी आरोप है कि वर्षों से बंद पड़े कल्वर्ट और नालियों की सफाई नहीं होने के कारण बरसाती पानी सड़क के नीचे रिसकर पहाड़ी को कमजोर कर रहा है। उनका कहना है कि हर साल अस्थायी मरम्मत तो होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाते।
घटना के बाद नगर पालिका परिषद मसूरी की अध्यक्ष मीरा सकलानी ने मौके का निरीक्षण कर राहत और सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। वहीं पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि सड़क के नीचे का हिस्सा खिसकने से नुकसान हुआ है और मौसम अनुकूल रहने पर मार्ग को सुरक्षित बनाने का कार्य तेजी से किया जाएगा।
उधर सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में भी बारिश ने हालात गंभीर कर दिए हैं। चीन सीमा तक जाने वाली महत्वपूर्ण सोबला-ढाकर सड़क पर पंगबावे क्षेत्र में विशालकाय चट्टान टूटकर गिर गई, जिससे सड़क पूरी तरह बंद हो गई।
यह सड़क सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। बीआरओ ने जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है और मौसम अनुकूल रहने पर बुधवार तक सड़क खोलने की उम्मीद जताई है।
लगातार बारिश के कारण पिथौरागढ़ जिले में 17 से अधिक सड़कें बंद हैं, जबकि कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क टूट गया है।
मुनस्यारी, नाचनी, होकरा और अन्य इलाकों में सड़कें बार-बार मलबा आने से बाधित हो रही हैं। कई गांवों में लोगों को अस्पताल और जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इधर मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने 27 जुलाई तक पूरे राज्य के लिए विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। 21 जुलाई को देहरादून, उत्तरकाशी और बागेश्वर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और पिथौरागढ़ सहित कई जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगले कई दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश, आकाशीय बिजली, भूस्खलन और चट्टान गिरने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने, नदी-नालों के उफान पर आने और निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। प्रशासन ने सभी जिलों को अलर्ट पर रखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने पर्यटकों और आम नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा केवल प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें। लगातार बारिश को देखते हुए पूरे प्रदेश में राहत एवं बचाव एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।


