आस्था, व्यवस्था और विवाद! चारधाम यात्रा फिर शुरू, सीता मंदिर और चढ़ावा चोरी पर कटघरे में BKTC
देहरादून। भारी बारिश के कारण एक दिन के लिए रोकी गई चारधाम यात्रा 21 जुलाई से फिर शुरू हो गई है। प्रशासन ने यात्रा मार्गों की समीक्षा के बाद श्रद्धालुओं के लिए यात्रा खोल दी है।
इस बीच चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना हुआ है।
दूसरी ओर चमोली के चाईं गांव स्थित प्राचीन माता सीता मंदिर की जर्जर हालत, बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी प्रकरण और बीकेटीसी पर लग रहे आरोपों को लेकर धार्मिक और राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है।
56.77 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण
21 जुलाई 2026 शाम 4:59 बजे जारी चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा बुलेटिन के अनुसार अब तक 56,77,298 श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं।
धामवार पंजीकरण इस प्रकार है:
- केदारनाथ: 18,37,020
- बदरीनाथ: 16,90,776
- गंगोत्री: 9,79,185
- यमुनोत्री: 9,36,825
- हेमकुंड साहिब: 2,33,492
अगले दो दिनों में 15,400 श्रद्धालुओं का पंजीकरण
22 और 23 जुलाई के दर्शन के लिए कुल 15,400 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है।
- 22 जुलाई: 7,602 यात्री
- 23 जुलाई: 7,798 यात्री
इन दो दिनों में सबसे अधिक पंजीकरण बदरीनाथ (5,043) और केदारनाथ (5,014) धाम के लिए हुआ है।
ऑफलाइन केंद्रों से भी जारी है पंजीकरण
21 जुलाई को उत्तराखंड के विभिन्न ऑफलाइन पंजीकरण केंद्रों से 1,909 श्रद्धालुओं का पंजीकरण किया गया। इनमें सबसे अधिक ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप से 1,089 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया।
चारधाम यात्रा फिर शुरू, प्रशासन हाई अलर्ट पर
गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि सभी जिलों के प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और संबंधित विभागों के समन्वय से यात्रा का संचालन किया जा रहा है।
संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा यात्रियों से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
मौसम विभाग ने देहरादून और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य पर्वतीय जिलों में भी भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बड़े बदलाव की तैयारी
सरकार अगले यात्रा सीजन से केदारनाथ यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की तैयारी कर रही है।
प्रस्ताव के अनुसार—
- पुराने पैदल मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए विकसित किया जाएगा।
- नए मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही कराने की योजना है।
- यात्रा मार्ग पर टॉयलेट, बैठने की व्यवस्था और अन्य सुविधाएं विकसित होंगी।
- बड़ी लिनचौली के पास कठिन चढ़ाई को कम करने के लिए नए एलाइनमेंट पर भी विचार किया जा रहा है।
- इस व्यवस्था से यात्रा मार्ग पर भीड़ कम होने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद है।
प्राचीन माता सीता मंदिर की बदहाली पर उठे
सवालचमोली जिले के चाईं गांव स्थित माता सीता का प्राचीन मंदिर जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उत्तर भारत का माता सीता को समर्पित एक दुर्लभ प्राचीन मंदिर है, लेकिन वर्षों से इसकी मरम्मत नहीं हुई। सुरक्षा कारणों से माता सीता की प्रतिमा को मंदिर से हटाकर एक कमरे में स्थापित कर पूजा कराई जा रही है।
ग्रामीणों और उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने बीकेटीसी से तत्काल पुनर्निर्माण की मांग की है। ग्राम प्रधान ने कहा कि यदि समिति निर्माण नहीं कराती तो ग्रामीण स्वयं जनसहयोग से मंदिर का निर्माण कराने को तैयार हैं।
₹127 करोड़ बजट के बावजूद उपेक्षा के आरोप
बीकेटीसी ने वर्ष 2025-26 के लिए लगभग ₹127 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद अधीनस्थ प्राचीन मंदिरों की अनदेखी हो रही है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि माता सीता मंदिर समिति के 45 अधीनस्थ मंदिरों में शामिल है तथा इसके निर्माण के लिए दानदाताओं ने भी रुचि दिखाई है।
चढ़ावा चोरी मामले पर कांग्रेस और बीकेटीसी आमने-सामने
बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामले को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
हेमंत द्विवेदी ने कहा कि एसआईटी, विभागीय और उच्चस्तरीय जांच एक साथ चल रही है तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाया।
गणेश गोदियाल ने दावा किया कि मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल उनके बीकेटीसी अध्यक्ष बनने से पहले से कार्यरत था और उन्होंने मुख्यमंत्री से बीकेटीसी अध्यक्ष की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच फिलहाल एसआईटी, विभागीय जांच और उच्च स्तरीय समिति द्वारा जारी है।
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही यात्रा प्रबंधन, मंदिरों के संरक्षण और बीकेटीसी की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल भी राज्य की धार्मिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।


