अपडेट: उत्तराखंड में RE-NEET के लिए हाई अलर्ट। 10 जिलों में 53 केंद्र, 21 हजार से अधिक अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

उत्तराखंड में RE-NEET के लिए हाई अलर्ट। 10 जिलों में 53 केंद्र, 21 हजार से अधिक अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

देहरादून। देशभर में रविवार, 21 जून को आयोजित होने जा रही NEET (यूजी) पुनर्परीक्षा को लेकर उत्तराखंड में प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं।

पिछली परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद दोबारा आयोजित हो रही इस महत्वपूर्ण परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं।

प्रदेश के 10 जिलों में कुल 53 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 21 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रखी गई है।

पुलिस प्रशासन, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के बीच समन्वय स्थापित कर बहुस्तरीय निगरानी तंत्र तैयार किया गया है।

देहरादून जिला प्रशासन ने सभी परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 लागू कर दी है।

इसके तहत परीक्षा केंद्रों के आसपास पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, नारेबाजी करने और लाउडस्पीकर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का कहना है कि अभ्यर्थियों की एकाग्रता और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

जारी आदेश के अनुसार परीक्षा केंद्रों के आसपास हथियार, लाठी-डंडे, हॉकी स्टिक, तलवार, विस्फोटक सामग्री और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं लेकर चलने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही किसी भी प्रकार के भड़काऊ भाषण, सांप्रदायिक टिप्पणियां, सार्वजनिक घोषणाएं या भ्रामक प्रचार-प्रसार पर भी रोक रहेगी।

देहरादून में इस बार 16 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां करीब 6,800 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। इन केंद्रों को दो सिटी कोऑर्डिनेटर के अधीन रखा गया है और प्रत्येक कोऑर्डिनेटर को आठ-आठ केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, जैमर, पर्याप्त पुलिस बल और स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं।

परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन ने भी विशेष रणनीति बनाई है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को प्रभारी बनाया गया है।

प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पुलिस के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की स्कॉर्ट ड्यूटी लगाई गई है। पिछले कई दिनों से स्थानीय थाना प्रभारियों द्वारा परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है।

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार परीक्षा की निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक तीन परीक्षा केंद्रों पर एक सुपरवाइजर के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम तैनात रहेगी, जो परीक्षा शुरू होने से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा समाप्त होने के बाद तक निगरानी करेगी।

हरिद्वार जिले में भी परीक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। जिले में कुल 12 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें आठ केंद्र ग्रामीण क्षेत्र और चार शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरे जिले को पांच जोन और 12 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है।

नैनीताल जिले में 11 परीक्षा केंद्रों पर 3,874 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। जिले को दो जोन और 11 सेक्टर में बांटा गया है। उधम सिंह नगर में पांच परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 2,528 परीक्षार्थी शामिल होंगे।

पिथौरागढ़ में केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, जबकि अल्मोड़ा के द्वाराहाट स्थित बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान में भी परीक्षा केंद्र स्थापित किया गया है।

सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश और निकास व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, जैमर, बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की जांच पूरी कर ली गई है। प्रशासन का दावा है कि परीक्षा केंद्रों को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया गया है।

इस बीच राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा देने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी न होने देना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परीक्षा संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा की पारदर्शिता, गोपनीयता और अभ्यर्थियों की सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष आयोजित NEET परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के कारण विवादों में आ गई थी। इसके बाद लाखों छात्रों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा था और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। ऐसे में इस बार पुनर्परीक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।

अभ्यर्थियों और शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा दोबारा आयोजित होने से छात्रों को अपनी क्षमता साबित करने का एक और अवसर मिला है, लेकिन इसके साथ मानसिक दबाव भी बढ़ा है। कई छात्र पिछले कुछ हफ्तों से दोबारा तैयारी में जुटे हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में उत्तराखंड में की गई व्यापक तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि प्रशासन किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।

अब सभी की निगाहें रविवार को होने वाली परीक्षा पर टिकी हैं। यदि परीक्षा शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न होती है, तो यह न केवल लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करेगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को भी मजबूत करेगी।