बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड में मानसून का कहर। 118 सड़कें बंद, चारधाम यात्रा में 210 मौतें, कई जिलों में हाई अलर्ट

उत्तराखंड में मानसून का कहर। 118 सड़कें बंद, चारधाम यात्रा में 210 मौतें, कई जिलों में हाई अलर्ट

  • भारी बारिश से भूस्खलन और जलभराव की घटनाएं बढ़ीं, नदियां खतरे के निशान से नीचे लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में प्रदेश में औसतन 52.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

भारी बारिश के चलते राज्यभर में 118 सड़कें बंद हैं, जबकि कई स्थानों पर भूस्खलन और कटाव की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर राहत एवं बहाली कार्य तेज कर दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 से अब तक राज्य में आपदा संबंधी घटनाओं में 20 लोगों की मौत और 23 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा नौ बड़े और 604 छोटे पशुओं की भी मौत हुई है, जबकि सात मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

118 सड़कें बंद, सबसे ज्यादा असर टिहरी और देहरादून में

प्रदेश में बंद 118 सड़कों में एक राष्ट्रीय राजमार्ग, पांच राज्य राजमार्ग, एक बीआरओ सड़क, दो एमडीआर और 109 ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। टिहरी में सबसे अधिक 22 सड़कें, देहरादून में 21 और चमोली में 16 सड़कें बाधित हैं।

विभागीय टीमें लगातार मार्ग खोलने में जुटी हैं। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर नालूपानी के पास भूस्खलन के बाद मार्ग बहाल कर दिया गया है, जबकि वहां स्थायी रूप से जेसीबी तैनात की गई है।

नदियों पर बढ़ी निगरानी, फिलहाल बाढ़ का खतरा नहीं

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, काली, सरयू और शारदा नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है, लेकिन सभी नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की अपील की है।

चारधाम यात्रा में 43.77 लाख श्रद्धालु, 210 मौतें

चारधाम यात्रा में अब तक 43.77 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इनमें बदरीनाथ में 14.66 लाख, केदारनाथ में 13.96 लाख, गंगोत्री में 6.87 लाख और यमुनोत्री में 6.39 लाख श्रद्धालु पहुंचे हैं। यात्रा अवधि के दौरान विभिन्न कारणों से अब तक 210 यात्रियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें सर्वाधिक 99 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चौबीसों घंटे निगरानी

रुद्रप्रयाग जिले में लगातार बारिश के बीच केदारनाथ यात्रा मार्ग पर प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक सभी संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। एहतियात के तौर पर केदारनाथ धाम के संगम घाट क्षेत्र को खाली कर श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।

नैनीताल और हरिद्वार में भी अलर्ट

नैनीताल प्रशासन ने गधेरों और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को नोटिस जारी कर सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं हरिद्वार में भीमगोड़ा बैराज पर गंगा का जलस्तर बढ़कर 291.10 मीटर पहुंच गया है, जो चेतावनी स्तर 293 मीटर से नीचे है।

सोलानी, पथरी रौ और बाणगंगा में उफान के कारण निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है और लोगों से गंगा किनारे न जाने की अपील की गई है।

प्रशासन की अपील

गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप और विभिन्न जिलों के प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय लोगों से मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने, संवेदनशील क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गर्जन और बिजली चमकने की संभावना जताई है।