बिग ब्रेकिंग: राजीव नयन नौटियाल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, निलंबन आदेश रद्द। सरकार को नए आदेश की छूट

राजीव नयन नौटियाल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, निलंबन आदेश रद्द। सरकार को नए आदेश की छूट

  • हाईकोर्ट बोला—निलंबन आदेश में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, नियमों के अनुरूप दोबारा कार्रवाई कर सकती है सरकार

देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) एवं तत्कालीन कालसी वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) राजीव नयन नौटियाल के निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने 10 जुलाई 2026 को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि निलंबन आदेश उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 की अनिवार्य कानूनी शर्तों का पालन किए बिना जारी किया गया था।

राज्य सरकार ने 25 जून 2026 को राजीव नयन नौटियाल को दो आरोपों के आधार पर निलंबित किया था। पहला आरोप सेवा के नियमितीकरण के दौरान अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे की जानकारी छिपाने का था, जबकि दूसरा आरोप वन मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय बैठक में अनुपस्थित रहने का था।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शशांक पांडे और अक्षय प्रधान ने दलील दी कि लगाए गए आरोप ऐसे नहीं हैं जिन पर बड़ी विभागीय सजा दी जा सके तथा निलंबन आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि आरोप इतने गंभीर हैं कि उनके सिद्ध होने पर प्रमुख दंड दिया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि निलंबन आदेश में इस आवश्यक कानूनी पहलू का उल्लेख नहीं किया गया था।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि नियम 4(1) के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को निलंबित करते समय आदेश में यह स्पष्ट दर्ज होना चाहिए कि आरोप इतने गंभीर हैं कि सिद्ध होने पर बड़ी सजा दी जा सकती है। चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए निलंबन आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।

हालांकि, अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और सरकार को कानून के अनुरूप नया निलंबन आदेश जारी करने की स्वतंत्रता भी दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में नया आदेश जारी होता है तो राजीव नयन नौटियाल उसे उपलब्ध सभी कानूनी आधारों पर चुनौती दे सकेंगे।

खनन के खिलाफ कार्रवाई से रहे चर्चा में

राजीव नयन नौटियाल उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। कालसी, विकासनगर, चकराता और आसन कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में उन्होंने कई अभियान चलाकर अवैध खनन, डंपरों की आवाजाही और मशीनों पर कार्रवाई की।

फरवरी 2026 में अवैध खनन की जांच के दौरान उनके साथ मारपीट की घटना भी हुई थी, जिसके बाद दर्ज मुकदमों और पुलिस कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट ने विकासनगर थाने के पूरे स्टाफ के तबादले तक के निर्देश दिए थे।

फैसले का महत्व

यह फैसला सरकारी विभागों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निलंबन जैसे कठोर प्रशासनिक कदम केवल आरोपों के आधार पर नहीं उठाए जा सकते, बल्कि आदेश में यह स्पष्ट रूप से दर्ज होना आवश्यक है कि आरोप इतने गंभीर हैं कि सिद्ध होने पर बड़ी विभागीय सजा दी जा सकती है। कानूनी प्रक्रिया का पालन न होने पर ऐसे आदेश न्यायिक समीक्षा में रद्द किए जा सकते हैं।