बिग ब्रेकिंग: RTI से खुलने लगे राज! शहीद सैनिक परिवार की जमीन मामले में मुख्य सचिव कार्यालय तलब

RTI से खुलने लगे राज! शहीद सैनिक परिवार की जमीन मामले में मुख्य सचिव कार्यालय तलब

देहरादून। चम्पावत जिले की पूर्णागिरि तहसील क्षेत्र में शहीद सैनिक और फ्रीडम फाइटर परिवार को आवंटित भूमि पर कथित कब्जे का मामला अब बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा बनता जा रहा है।

मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच के आदेश जारी होने के बाद अब उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने भी सुनवाई तय कर दी है, जिससे शासन और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

पीड़ित परिवार के सदस्य नवीन चन्द्र जोशी, पुत्र स्वर्गीय जर्नादन जोशी, निवासी आर.के. टैंट रोड, गोविन्दपुरम कुसुमखेड़ा, हल्द्वानी ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया है।

उनका कहना है कि राजस्व विभाग को पूर्व में पैमाइश और कब्जा दिलाने के लिए सरकारी शुल्क भी जमा कराया गया था, लेकिन कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।

परिवार के अनुसार, पूर्व में जब राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी तब विरोध और हंगामे की स्थिति बन गई थी, जिसके चलते पैमाइश की प्रक्रिया अधूरी रह गई।

मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद जिलाधिकारी चम्पावत को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, कानूनगो और राजस्व टीम को मामले की जांच सौंपी गई है।

इसी प्रकरण में मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी गई शिकायत पर कार्रवाई की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई थी।

आरोप है कि आरटीआई आवेदन स्वीकार नहीं किया गया, जिसके बाद समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया के सहयोग से मामला उत्तराखण्ड सूचना आयोग पहुंचा।

सूचना आयोग ने शिकायत संख्या 16849/2026-27 पर संज्ञान लेते हुए 29 मई 2026 को सुबह 11:15 बजे सुनवाई निर्धारित की है।

आयोग ने मुख्य सचिव कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी से जवाब भी तलब किया है। आयोग ने प्रथम दृष्टया माना है कि मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं।

अब यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासन स्तर पर आरटीआई कानून के अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों के अनुसार यदि सुनवाई में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना और विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।

समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वैधानिक लड़ाई जारी रहेगी।

उन्होंने दावा किया कि लगातार आरटीआई, शिकायतों और दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए मामले को शासन स्तर तक पहुंचाया गया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जो मामला वर्षों से लंबित था, उसमें अब तेजी से कार्रवाई होती दिखाई दे रही है। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर 29 मई को होने वाली सूचना आयोग की सुनवाई पर टिकी हुई है।