नैनीताल टैक्सी विवाद पर हाईकोर्ट सख्त। सरकार, पालिका और यूनियन से मांगे सुझाव
नैनीताल। Uttarakhand High Court ने नैनीताल नगरपालिका क्षेत्र में टी-सीरीज टैक्सियों को लेकब्रिज चुंगी पास जारी नहीं किए जाने के मामले में राज्य सरकार और नगर पालिका से जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित पक्षों को बैठक कर समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह सुनवाई प्रो. अजय रावत समेत टैक्सी यूनियन की ओर से दायर याचिकाओं पर हुई। न्यायालय ने 12 सितंबर 2023 को पारित आदेश के अनुपालन में अब तक सुझाव समिति का गठन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई और राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया।
डीएम, SSP और व्यापार मंडल के साथ होगी बैठक
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि जिलाधिकारी, एसएसपी, व्यापार मंडल अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष और अधिवक्ता केतन जोशी की मौजूदगी में बैठक आयोजित कर टैक्सी संचालन से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जाए। बैठक में लिए गए निर्णयों को अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
मनमाने किराये पर भी हाईकोर्ट की नजर
सुनवाई के दौरान टैक्सी यूनियनों द्वारा कथित मनमाने किराये वसूले जाने का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए किराया सूची तय करने और उसे सभी टैक्सी स्टैंडों पर सार्वजनिक रूप से चस्पा करने के निर्देश देने पर विचार करने को कहा।
सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि हल्द्वानी जाने के लिए उनसे सीजन का हवाला देकर पूरी टैक्सी 180 रुपये में बुक करने को कहा गया। इस पर अदालत ने कहा कि किराया व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए।
टैक्सी यूनियन ने लगाया भेदभाव का आरोप
मामले में तल्लीताल टैक्सी यूनियन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2017 के बाद की टैक्सियों को नगर क्षेत्र में प्रवेश के लिए पास जारी नहीं किए जा रहे हैं, जबकि बाहरी क्षेत्रों की टैक्सियों को पास दिए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार स्थानीय टैक्सी चालकों से लेकब्रिज चुंगी के नाम पर 200 रुपये वसूले जा रहे हैं। यूनियन ने इसे स्थानीय निवासियों के साथ सौतेला व्यवहार बताते हुए नगर पालिका को कई बार प्रत्यावेदन देने की बात कही, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से व्यावहारिक समाधान और स्पष्ट सुझावों के साथ अदालत में उपस्थित होने को कहा है।

