B.PEd–M.PEd भर्ती पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब। लैब तकनीशियनों को बड़ी राहत
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में B.PEd और M.PEd प्रशिक्षित बेरोजगारों की भर्ती को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि कक्षा 1 से 12 तक अनिवार्य किए गए फिजिकल एजुकेशन विषय के लिए शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई शिक्षा नीति 2020 और वर्ष 2025 की नियमावली में फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य किया गया है, इसके बावजूद सरकार ने अब तक शिक्षकों के पदों पर भर्ती के लिए कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की है।
इससे छात्र शारीरिक शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, जबकि प्रशिक्षित अभ्यर्थी बेरोजगार हैं। याचिका में कोर्ट से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
वहीं, लैब तकनीशियनों के मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी और लैब तकनीशियनों को 15 अप्रैल 2010 से संशोधित वेतनमान देने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लैब तकनीशियन, डेंटल हाइजीनिस्ट और एक्स-रे तकनीशियनों के कार्य और शैक्षणिक योग्यता समान होने के बावजूद वेतन में भेदभाव करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल वित्त विभाग की आपत्तियां वेतन वृद्धि रोकने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकतीं।
मामला माधव प्रसाद डोभाल और अन्य की याचिका से जुड़ा है, जिसमें 2015 के सरकारी आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में याचिकाकर्ताओं को 15 अप्रैल 2010 से एरियर सहित लाभ देने के निर्देश दिए हैं और इसे “जजमेंट इन परसोनाम” माना है, यानी इसका लाभ केवल याचिकाकर्ताओं को ही मिलेगा।

