विधानसभा सत्र 2026: देहरादून में ‘नारी सम्मान’ सत्र पर सियासत गरम, सदन के भीतर बहस और बाहर प्रदर्शन

देहरादून में ‘नारी सम्मान’ सत्र पर सियासत गरम, सदन के भीतर बहस और बाहर प्रदर्शन

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र “नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार” के दौरान महिला आरक्षण का मुद्दा पूरी तरह केंद्र में रहा। सदन के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जबकि बाहर सड़कों पर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भी उभर कर सामने आया।

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने अपने संबोधन में उत्तराखंड आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को याद करते हुए कहा कि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संरचना में महिलाओं का योगदान हमेशा निर्णायक रहा है।

उन्होंने महिला आरक्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को नीति निर्माण में सशक्त भागीदारी देगा। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए सदन से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने की अपील की।

वहीं नेता प्रतिपक्ष Yashpal Arya ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि महिला आरक्षण कानून लागू कब होगा और इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा नया नहीं है और सरकार इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।

विधानसभा अध्यक्ष Ritu Khanduri Bhushan ने सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए सभी दलों से अपील की कि वे इस विषय को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखें और महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने की दिशा में सकारात्मक संदेश दें।

सदन के भीतर जहां सत्ता पक्ष ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया, वहीं विपक्ष ने इसे घोषणात्मक राजनीति करार दिया। दोनों पक्षों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

इसी बीच, विधानसभा के बाहर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” के बैनर तले निकाली गई रैली को पुलिस ने रिस्पना पुल के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प भी हुई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार महिला सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर नहीं है और मामले में वीआईपी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। मंच की सदस्य कमला पंत ने कहा कि यदि अंकिता को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को देशव्यापी रूप दिया जाएगा।

उधर कांग्रेस प्रवक्ता Alok Sharma ने विशेष सत्र को औचित्यहीन बताते हुए इसे जनता के पैसे की बर्बादी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के सत्र आयोजित कर रही है।

कुल मिलाकर, विधानसभा के भीतर महिला आरक्षण को लेकर सहमति बनाने की कोशिश और बाहर महिला सुरक्षा को लेकर उभरते जनाक्रोश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में नारी सशक्तिकरण अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है।

अब देखना होगा कि यह बहस नीतिगत फैसलों में बदलती है या केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित रह जाती है।