बिग ब्रेकिंग: हाईकोर्ट के दो बड़े फैसले। जल विद्युत टैक्स पर सरकार को झटका, स्टोन क्रशर यूनिट को राहत

हाईकोर्ट के दो बड़े फैसले। जल विद्युत टैक्स पर सरकार को झटका, स्टोन क्रशर यूनिट को राहत

नैनीताल। उत्तराखंड से जुड़े दो अहम मामलों में नैनीताल हाईकोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। एक ओर जहां जल विद्युत परियोजनाओं पर लगाए गए टैक्स को लेकर राज्य सरकार को झटका लगा है, वहीं दूसरी ओर विकासनगर स्थित साईं कृपा स्टोन क्रशर यूनिट को बड़ी राहत मिली है।

पहले मामले में न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बिजली उत्पादन (जनरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी) पर टैक्स नहीं लगा सकती।

अदालत ने कहा कि यह विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए राज्य द्वारा लगाया गया टैक्स वैधानिक रूप से उचित नहीं है। यह फैसला विभिन्न हाइड्रो पावर कंपनियों की ओर से दायर विशेष अपीलों पर सुनाया गया।

दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2012 में ‘उत्तराखंड जल विद्युत उत्पादन पर जल कर अधिनियम’ लागू कर जल विद्युत परियोजनाओं पर 2 से 10 पैसे प्रति यूनिट तक वाटर टैक्स लगाया था।

इसे THDC, NHPC, अलकनंदा पावर प्रोजेक्ट समेत कई कंपनियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि पहले एकलपीठ ने इस अधिनियम को वैध ठहराते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं, लेकिन बाद में खंडपीठ में मतभेद होने पर मामला पुनः विचार के लिए भेजा गया, जिस पर अब यह फैसला आया है।

वहीं, दूसरे मामले में विकासनगर के भीमावाला स्थित साईं कृपा स्टोन क्रशर यूनिट पर लगी अंतरिम रोक को हाईकोर्ट ने हटा दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि यह क्रशर यूनिट घनी आबादी, स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र के पास स्थापित की जा रही है, जो नियमों के विरुद्ध है और इससे पर्यावरण व लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। साथ ही Central Pollution Control Board (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया था।

प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट ने जुलाई 2025 में यूनिट के निर्माण और संचालन पर रोक लगा दी थी। हालांकि बाद में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और विशेषज्ञ समितियों की जांच में पाया गया कि यूनिट की वायु गुणवत्ता, ध्वनि स्तर और उत्पादन क्षमता निर्धारित मानकों के भीतर है।

इन रिपोर्टों और सभी पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने अंतरिम रोक को निरस्त कर दिया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 4 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है।

एक ओर जहां जल विद्युत कंपनियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है, वहीं स्टोन क्रशर यूनिट के संचालन पर भी फिलहाल कोई रोक नहीं रहेगी।