जंगल से बस्तियों तक दहशत। बाघों का आतंक, आग से बढ़ा संकट
देहरादून। उत्तराखंड में इस समय दोहरा संकट गहराता नजर आ रहा है। एक ओर जहां वन्यजीवों के हमले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जंगलों में आग की घटनाएं हालात को और गंभीर बना रही हैं। पहाड़ से लेकर तराई तक कई इलाकों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
बाघों का बढ़ता आतंक, तीन महीनों में 117 हमले
राज्य में वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से मार्च के बीच 117 हमले दर्ज किए गए, जिनमें 20 लोगों की मौत और 97 लोग घायल हुए हैं।
इन हमलों में सबसे ज्यादा खतरनाक रूप टाइगर का सामने आया है। कुल 20 मौतों में से 10 लोगों की जान केवल बाघों के हमलों में गई है।
खास बात यह है कि बाघ के हमलों में घायल होने का कोई मामला सामने नहीं आया, जिससे इसकी घातकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रामनगर और नैनीताल डिवीजन में बाघों के हमले ज्यादा सामने आए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में दहशत का माहौल है।
बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष बना चुनौती
Uttarakhand Forest Department के अनुसार, जंगलों में भोजन की कमी, बढ़ता मानव हस्तक्षेप और प्राकृतिक आवास का सिकुड़ना वन्यजीवों के बस्तियों की ओर बढ़ने के मुख्य कारण हैं।
वन मंत्री Subodh Uniyal ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि विभाग द्वारा जागरूकता अभियान, सोलर लाइट और सुरक्षा उपाय लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन आम लोगों की सावधानी भी बेहद जरूरी है।
वहीं प्रमुख वन संरक्षक Ranjan Kumar Mishra का कहना है कि वन्यजीवों के मूवमेंट पैटर्न में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिसे समझना और उसी के अनुसार रणनीति बनाना जरूरी हो गया है।
नैनीताल के जंगलों में आग का तांडव
इधर, नैनीताल के गेठिया क्षेत्र समेत आसपास के जंगलों में पिछले 24 घंटे से भीषण आग धधक रही है। आग ने कई हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है।
आग के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और उनकी जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। धुएं और लपटों से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों में भी चिंता का माहौल है।
आग बुझाने में जुटी कई एजेंसियां
आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग, दमकल, आर्मी और कैंटोनमेंट बोर्ड की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं। हालांकि तेज हवाएं आग को और भड़का रही हैं, जिससे हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी नरेंद्र कुमार के अनुसार, पिछले 24 घंटों से लगातार आग बुझाने का प्रयास जारी है, लेकिन हवा के कारण आग तेजी से फैल रही है।
लापरवाही भी बन रही बड़ी वजह
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई बार मानव लापरवाही के चलते भी जंगलों में आग लग जाती है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि सड़क किनारे लगाई गई आग देखते ही देखते गांव तक पहुंच गई।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगलों में आग लगाने जैसी गतिविधियों से बचें और किसी भी संदिग्ध घटना की तुरंत सूचना दें।
बढ़ सकता है संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में मानव-वन्यजीव संघर्ष और जंगलों में आग की घटनाएं और विकराल रूप ले सकती हैं।
ऐसे में जरूरी है कि सरकार, वन विभाग और आम जनता मिलकर इस दोहरे संकट से निपटने के लिए ठोस रणनीति अपनाएं, ताकि मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों और पर्यावरण की भी रक्षा की जा सके।

