बिग ब्रेकिंग: अब्दुल मलिक को हाईकोर्ट से राहत, बनभूलपुरा दंगे के तीन मामलों में मिली जमानत

अब्दुल मलिक को हाईकोर्ट से राहत, बनभूलपुरा दंगे के तीन मामलों में मिली जमानत

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के चर्चित बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों में जमानत मंजूर कर दी है। यह फैसला न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने सुनाया।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व में राज्य सरकार और आरोपी पक्ष से यह स्पष्ट करने को कहा था कि अब्दुल मलिक के खिलाफ दर्ज अन्य सात मुकदमों की वर्तमान स्थिति क्या है, कितने मामलों में वह बरी हो चुके हैं और कितने अभी विचाराधीन हैं।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जांच में सात अन्य मुकदमों की पुष्टि हुई है, जिनमें कुछ में आरोपी बरी हो चुका है, जबकि कुछ मामलों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

मुकदमों की स्थिति स्पष्ट न होने के चलते कोर्ट ने बनभूलपुरा दंगे से जुड़े मामलों में अब्दुल मलिक को जमानत देने का फैसला सुनाया। दंगे से संबंधित कुल चार मामलों में से एक में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी, जबकि शेष तीन मामलों में अब जमानत दे दी गई है।

क्या हैं आरोप

अब्दुल मलिक पर राजकीय भूमि को खुर्द-बुर्द करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने जैसे गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने नजूल भूमि पर कब्जा कर अवैध प्लॉटिंग और निर्माण कर उसे बेचने का काम किया।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि बनभूलपुरा कांड की शुरुआत इसी अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से हुई थी। जब प्रशासन कार्रवाई करने पहुंचा तो उस पर पथराव किया गया, जो बाद में हिंसक दंगे में बदल गया। इस दौरान पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हुए, जबकि कई लोगों की जान भी गई।

बचाव पक्ष की दलील

आरोपी पक्ष का कहना था कि अब्दुल मलिक को झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नहीं था और पुलिस ने उन्हें जबरन मामले में शामिल किया। साथ ही यह भी दलील दी गई कि दंगे में शामिल 100 से अधिक लोगों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, ऐसे में उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद साक्ष्यों और मुकदमों की स्थिति को देखते हुए अब्दुल मलिक को जमानत देने का आदेश दिया है। इस फैसले को बनभूलपुरा कांड में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।