गैरसैंण में गरमाया सियासी माहौल, बजट सत्र के पहले दिन विपक्ष का प्रदर्शन
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र सोमवार सुबह राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया।
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में शुरू हुए इस सत्र के पहले ही दिन सदन के अंदर और बाहर जोरदार राजनीतिक हलचल देखने को मिली।
सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर की सीढ़ियों पर बैठकर सरकार के खिलाफ धरना दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार पहले ही दिन बजट पेश कर महत्वपूर्ण सवालों और चर्चाओं से बचने की कोशिश कर रही है।
धरने के दौरान हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत, खटीमा से विधायक भुवन कापड़ी और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित कई विपक्षी नेता मौजूद रहे।
इसी बीच कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने प्रदर्शन कर रहे विपक्षी विधायकों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र के हित में इस बार सदन को शांतिपूर्वक चलने दिया जाए ताकि जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो सके।
आज पेश होगा 2026-27 का बजट
दो दिवसीय इस बजट सत्र में राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी। कार्यसूची के अनुसार सत्र की शुरुआत दोपहर 2 बजे ‘वंदे मातरम्’ के साथ होगी।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण सदन में राज्यपाल के अभिभाषण को पढ़कर सुनाएंगी।
इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोपहर 3 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 का आय-व्ययक (बजट) सदन के पटल पर रखेंगे।
करीब 1.11 लाख करोड़ का हो सकता है बजट
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार का बजट करीब 1.11 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। इसमें राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर फोकस रहने की संभावना है।
विधानसभा सचिवालय के अनुसार इस सत्र के लिए अब तक 38 विधायकों की ओर से 531 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जिन पर सदन में चर्चा होने की उम्मीद है।
‘विजन-2050’ की दिशा में बजट
बताया जा रहा है कि इस बार का बजट राज्य के ‘विजन-2050’ की रूपरेखा से भी जुड़ा होगा। उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के बाद सरकार अगले 25 वर्षों के विकास को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है।
सरकार के अनुसार बजट में पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऑर्गेनिक खेती, ग्रीन एनर्जी और बुनियादी ढांचे के विकास को प्रमुख प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके लिए विभिन्न वर्गों और हितधारकों से सुझाव भी लिए गए हैं, ताकि विकास योजनाओं में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।



