चमोली का दर्द: सड़क न होने से पालकी में 10 किमी ढोकर अस्पताल पहुंचाई गई घायल महिला
रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
चमोली। विकास के दावों के बीच जनपद चमोली के दशोली ब्लॉक का दूरस्थ गांव मौली हडूंगा आज भी सड़क सुविधा से वंचित है।
यहां की जमीनी हकीकत एक बार फिर तब सामने आई, जब गांव की निवासी गुड्डी देवी (पत्नी वीरेंद्र सिंह) पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को 10 किलोमीटर तक पैदल सफर तय करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, गुड्डी देवी रोज की तरह जंगल में चारापत्ती लेने गई थीं, तभी अचानक पेड़ से फिसलकर गिर गईं। घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना संभव नहीं था।
ऐसे में ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए घायल महिला को डंडी-कंडी (पालकी) के सहारे दुर्गम पहाड़ी रास्तों से पैदल सड़क तक पहुंचाया और फिर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा गांव
मौली हडूंगा गांव आज भी सड़क मार्ग से नहीं जुड़ा है। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी ही सहारा बनती है, जो कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
ग्रामीणों की मांग: जल्द बने सड़क मार्ग
ग्राम प्रधान भगत फरस्वाण के अनुसार, गांव में सड़क समेत बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है। ग्रामीणों को करीब 8 से 10 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उनकी जान तक खतरे में पड़ जाती है।
विकास के दावों पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी योजनाओं और विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव को सड़क मार्ग से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी को इस तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
चमोली के इस गांव की तस्वीर बताती है कि आज भी पहाड़ के कई हिस्से बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं। जब तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं पहुंचेगी, तब तक ऐसे दर्दनाक हालात सामने आते रहेंगे।
