सोमवार से सत्र शुरू। 38 विधायकों के 600 सवाल, CM धामी और विधानसभा अध्यक्ष पहुंचे गैरसैण
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। भौगोलिक दृष्टि से उत्तराखंड का मध्य स्थल माने जाने वाला गैरसैंण राज्य आंदोलन के समय से ही राजनीतिक और जनभावनाओं का केंद्र रहा है। लंबे संघर्ष के बाद जब इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिला, तो उम्मीद जगी कि यह क्षेत्र राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक धुरी बन सकता है।
आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। कभी “गैरसैंण गैर किल्लै” के तंज से घिरा यह इलाका अब धीरे-धीरे “संभावनाओं का गैरसैंण” बनता दिखाई दे रहा है। ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद यहां करीब 8 हजार करोड़ रुपये के ढांचागत विकास कार्य किए जा चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों और राज्यवासियों की उम्मीदें लगातार मजबूत हुई हैं।
आंदोलन से राजधानी तक का सफर
यदि वर्ष 2013 की बात करें तो उस समय कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा थे। उसी दौरान वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज की पहल और आग्रह पर भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन के लिए भूमि पूजन हुआ, जिसने गैरसैंण को राजधानी बनाने की दिशा में पहला ठोस कदम माना गया।
इसके बाद वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार ने लगभग 47 एकड़ भूमि पर विधानसभा परिसर का निर्माण कार्य शुरू कराया। यह कदम पहाड़ के लोगों और राज्य आंदोलनकारियों की वर्षों पुरानी मांग को नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ।
तेजी से हुआ ढांचागत विकास
पिछले कुछ वर्षों में भराड़ीसैंण में कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पूरे किए गए हैं।
- विधानसभा का मुख्य भवन
- मंत्रियों और विधायकों के आवास
- अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास
- हेलीपैड का निर्माण
- डबल लेन सड़कें
- पेयजल और विद्युत व्यवस्थाएं
- बड़ी पार्किंग सुविधाएं
इसके अलावा महिला कर्मचारी हॉस्टल और मीडिया आवास का निर्माण कार्य फिलहाल प्रगति पर है।
इसी बीच वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। इस घोषणा ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी और गैरसैंण को लेकर नई उम्मीदों के द्वार खुल गए।
स्थायी राजधानी पर अब भी उम्मीद
हालांकि मौजूदा पुष्कर सिंह धामी सरकार ने विधानसभा परिसर के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने और आसपास के गांवों के विकास पर कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन पिछले पांच वर्षों में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने को लेकर कोई बड़ा फैसला नहीं हो पाया।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यहां सचिवालय निर्माण को स्वीकृति मिल जाती, तो ग्रीष्मकालीन राजधानी की अवधारणा और मजबूत होती।
नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी का कहना है कि सचिवालय निर्माण की स्वीकृति न मिलना आमजन को उपेक्षा का संदेश देता है। वहीं राज्य आंदोलनकारी सुरेश कुमार बिष्ट और हरेंद्र कंडारी का कहना है कि पहाड़ी जिलों के लोग लंबे समय से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग कर रहे हैं और अब भी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
बजट सत्र से बढ़ी उम्मीदें
इसी पृष्ठभूमि में 9 मार्च से 13 मार्च तक भराड़ीसैंण में आयोजित होने जा रहा उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि इस सत्र में गैरसैंण के भविष्य को लेकर कोई ठोस चर्चा या निर्णय सामने आ सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने किया निरीक्षण
बजट सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी रविवार को भराड़ीसैंण पहुंचीं। विधानसभा परिसर में पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
उन्होंने विधानसभा मंडप सहित पूरे परिसर का निरीक्षण किया और यहां स्थापित आधुनिक जिम का भी जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया हाउस और महिला कर्मचारी हॉस्टल के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जल्द और बेहतर तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
38 विधायकों के करीब 600 सवाल
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि बजट सत्र काफी महत्वपूर्ण होने वाला है।
- सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी
- इसके बाद राज्य का वार्षिक बजट पेश किया जाएगा
उन्होंने बताया कि अब तक 38 विधायकों की ओर से करीब 600 सवाल प्राप्त हो चुके हैं, जिन पर सत्र के दौरान चर्चा होगी।
मुख्यमंत्री भी पहुंचे भराड़ीसैंण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे भराड़ीसैंण पहुंच गए। पुलिस दल ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
इसके साथ ही राज्य के अन्य मंत्री और विधायक भी लगातार भराड़ीसैंण पहुंच रहे हैं। देर शाम विधानमंडल दल की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें सत्र को सुचारू रूप से चलाने और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर रणनीति तय की जाएगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बजट सत्र को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि वीआईपी आगमन को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
- 5 कंपनी पीएसी तैनात
- एक कंपनी और एक प्लाटून सलामी के लिए
- संभावित धरना-प्रदर्शनों को देखते हुए कई बैरियर लगाए गए
सुरक्षा के लिहाज से
- दिवालीखाल में 2 बैरियर
- सारकोट में 1
- जंगलचट्टी में 1
- कालीमाटी के पास दुगमुतासैंण में 1 बैरियर लगाया गया है।
इसके अलावा एहतियातन मेहलचौरी और जंगलचट्टी में अस्थायी जेल भी बनाई गई हैं।
गैरसैंण पर टिकी सबकी नजर
कुल मिलाकर भराड़ीसैंण में शुरू होने जा रहा यह बजट सत्र केवल वित्तीय योजनाओं तक सीमित नहीं माना जा रहा। राज्य आंदोलन की भावनाओं से जुड़े गैरसैंण के भविष्य पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या इस सत्र के दौरान स्थायी राजधानी के सवाल पर कोई नई पहल या संकेत सामने आते हैं या फिर गैरसैंण की उम्मीदें आगे के राजनीतिक फैसलों तक टलती हैं।



