देहरादून नगर निगम में बड़ा घोटाला। कागज़ों में बनी सड़क का 20 लाख भुगतान, जांच शुरू
देहरादून। देहरादून नगर निगम एक बार फिर सवालों के घेरे में है। निगम के वार्ड 41 इंद्रपुरम स्थित साईं लोक कॉलोनी के राज एन्क्लेव में कागज़ों में सड़क बनाकर करीब 20 लाख रुपये का भुगतान कर दिए जाने का मामला सामने आया है। क्षेत्र में सड़क का नामोनिशान तक नहीं है, लेकिन निर्माण बोर्ड लगाकर काम पूरा दिखा दिया गया।
कागज़ों में बनी दो सड़कें, भुगतान भी निपट गया
पूर्व बोर्ड के कार्यकाल में यहां दो सड़कों 125 मीटर और 175 मीटर का निर्माण प्रस्तावित था। शिकायतें मिलने पर पता चला कि 125 मीटर की सड़क को 140 मीटर दर्शाया गया जबकि 175 मीटर वाली सड़क कभी बनी ही नहीं।
बावजूद इसके नगर निगम ने कागज़ों में काम पूरा दिखाकर लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान ठेकेदार को दे दिया। निर्माण स्थल पर लगे बोर्ड में 2024–25 को निर्माण वर्ष बताया गया है और काम पूरा होने का दावा भी किया गया है।
इस तरह खुला मामला
नए पार्षद और क्षेत्रवासियों ने जब लोक निर्माण अनुभाग से जानकारी मांगी, तो पता चला कि, सड़क का निर्माण जनवरी 2025 को दिखाया गया लेकिन ठेकेदार ने कागज़ों में नवंबर 2024 की बैक डेट दर्शाकर भुगतान ले लिया। वास्तविकता में सड़क का कोई अस्तित्व नहीं है।
कॉलोनीवासी रमेश चंद्र मिश्रा का आरोप है कि, 175 मीटर की सड़क में पूरा घोटाला हुआ है और चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान पेमेंट लिया गया। उनका दावा है कि ठेकेदार पूर्व पार्षद आशा भाटी का बेटा है, इसलिए पेमेंट तेजी से जारी कराया गया।
एसबी त्यागी सहित कई कॉलोनीवासियों ने मामले की शिकायत स्थानीय विधायक, नगर आयुक्त और निगम अधिकारियों से की है।
पूर्व पार्षद आशा भाटी ने आरोपों से किया इंकार
एक बातचीत में पूर्व पार्षद आशा भाटी ने सभी आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि,
- वर्तमान पार्षद के परिवार द्वारा लोगों को भड़काया जा रहा है।
- 175 मीटर सड़क की धनराशि तकनीकी कारणों से कहीं और ट्रांसफर कर दी गई, जिसकी जानकारी बोर्ड में थी।
अपने बेटे को ठेका मिलने पर उन्होंने कहा कि, “अगर बेटा ठेकेदार है और उसे टेंडर मिला, तो इसमें क्या गलत है?” नगर निगम द्वारा उन्हें नोटिस भेजा गया है, जिसका जवाब वे देंगी।
नगर निगम जांच में जुटा
नगर आयुक्त नमामि बंसल ने पुष्टि की कि पूर्व बोर्ड ने सड़क निर्माण का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन इसे बिना औपचारिक आदेश के कहीं और शिफ्ट कर दिया गया।
किसने यह संशोधन किया, इसकी जांच की जा रही है।
साथ ही यह भी जांच होगी कि बिना सड़क बने ठेकेदार को भुगतान किस आधार पर जारी किया गया। नगर निगम ने कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई तय है।
सोर्स:- ETV भारत

