विरासत महोत्सव-2026 का भव्य आगाज, छोलिया नृत्य और पंडित साजन मिश्रा की गायकी ने बांधा समां
देहरादून। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भारतीय शास्त्रीय संगीत और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित ‘विरासत आर्ट एंड हैरिटेज फेस्टिवल-2026’ का शुक्रवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में भव्य शुभारंभ हुआ।
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। महोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया नृत्य और पद्म भूषण से सम्मानित पंडित साजन मिश्रा की शास्त्रीय गायकी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वहीं, महोत्सव परिसर में सजे फूड कोर्ट और हस्तशिल्प एवं वस्त्रों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्यरत संस्था रिच (RICH) की ओर से आयोजित इस महोत्सव में पहले दिन लोककला, संगीत और पारंपरिक जीवनशैली का अनूठा संगम देखने को मिला। नए स्थान पर सजे भव्य मंच और आकर्षक आयोजन ने महोत्सव की शुरुआत को खास बना दिया।
छोलिया नृत्य ने बिखेरे उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के रंग
महोत्सव की पहली सांस्कृतिक प्रस्तुति उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया लोकनृत्य की रही। चंदन बोहरा के नेतृत्व में छोलिया डांस ग्रुप के कलाकारों ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध लोकपरंपरा से रूबरू कराया।
पारंपरिक वेशभूषा, तलवारों के साथ युद्ध कौशल का प्रदर्शन और संगीत की लय पर कलाकारों की सधी हुई गतिविधियों ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बना दिया।
छोलिया नृत्य उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की प्रमुख लोककलाओं में शामिल है। पारंपरिक रूप से विवाह समारोहों और बारातों से जुड़ा यह नृत्य अब विभिन्न मांगलिक एवं सांस्कृतिक अवसरों पर भी प्रस्तुत किया जाता है।
तलवारों के साथ युद्ध शैली में किए जाने वाले इस नृत्य में साहस, शौर्य और सामूहिक तालमेल की झलक दिखाई देती है।
इस नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत किया। लोककलाओं की ऐसी प्रस्तुतियां न केवल क्षेत्रीय परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रस्तुति में जगमोहन आगरी, कृष्ण आर्य, गोधन राम, रमेश राम, देव राम, गोपाल सिंह, पुरव बोरा, दीवान राम, हरीश राम, खीम राम, दयाल राम, नंदन राम, महेश राम, भुवन कुमार, गंगा धामी, मीनू सुपियाल, तनुजा पाठक और गिरीश कुमार सहित अन्य कलाकार शामिल रहे।
पंडित साजन मिश्रा की गायकी ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
विरासत महोत्सव की पहली शाम भारतीय शास्त्रीय संगीत के नाम रही। बनारस घराने के प्रख्यात गायक पंडित साजन मिश्रा ने अपने सुपुत्र स्वरांश मिश्रा के साथ मंच पर प्रस्तुति दी।
उनके गायन ने श्रोताओं को सुरों की ऐसी दुनिया से रूबरू कराया, जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई, परंपरा और रचनात्मकता का अद्भुत मेल देखने को मिला।
पंडित साजन मिश्रा के साथ तबले पर अभिषेक मिश्रा और हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा ने संगत की। गायन, तबले और हारमोनियम के बीच बेहतरीन तालमेल ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बनाया।
प्रस्तुति की शुरुआत राग आधारित गायन से हुई। कलाकारों ने सुरों के प्रवाह और तात्कालिक रचनात्मकता के साथ अपनी प्रस्तुति को आगे बढ़ाया।
शास्त्रीय संगीत की बारीकियों, लयकारी और स्वरों के उतार-चढ़ाव ने संगीत प्रेमियों को खास अनुभव दिया। पिता-पुत्र की जोड़ी ने अपनी गायकी के माध्यम से बनारस की समृद्ध संगीत परंपरा की झलक पेश की।
बनारस घराने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे मिश्रा
पंडित साजन मिश्रा भारतीय शास्त्रीय संगीत की ख्याल गायकी के प्रतिष्ठित नामों में शामिल हैं। उन्होंने अपने भाई पंडित राजन मिश्रा के साथ देश-विदेश में भारतीय संगीत की पहचान स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
दोनों कलाकारों ने अपनी गायकी के माध्यम से बनारस घराने की परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।
पंडित साजन मिश्रा को वर्ष 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और राष्ट्रीय तानसेन सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
वहीं, स्वरांश मिश्रा अपने पिता के साथ बनारस घराने की शास्त्रीय संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी प्रस्तुति में पारंपरिक गायकी के साथ नई पीढ़ी की रचनात्मकता भी दिखाई दी।
विरासत महोत्सव में पिता-पुत्र की इस संगीत प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की निरंतरता और उसकी समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया।
फूड कोर्ट और पारंपरिक वस्तुओं के स्टॉल भी बने आकर्षण
विरासत महोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ खानपान और खरीदारी का भी विशेष आकर्षण रहा। फूड कोर्ट में देश के विभिन्न स्वादों से जुड़े लजीज व्यंजनों का आगंतुकों ने आनंद लिया।
वहीं, पारंपरिक वस्त्रों, आकर्षक परिधानों, मखमली शॉल और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुओं के स्टॉल पर भी लोगों की आवाजाही बनी रही।
आगंतुकों ने विभिन्न स्टॉलों पर उपलब्ध वस्तुओं की खरीदारी की। इस तरह महोत्सव ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक शिल्प, खानपान और स्थानीय उत्पादों को भी मंच प्रदान किया।
दीप प्रज्वलन के दौरान मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य सचिव आनंद वर्धन के साथ रिच संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह, संयुक्त सचिव विजय श्रीजोशी तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी समीर सिन्हा उपस्थित रहे।
विरासत आर्ट एंड हैरिटेज फेस्टिवल-2026 की पहली शाम ने लोकनृत्य और शास्त्रीय संगीत के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विविधता की खूबसूरत तस्वीर पेश की।
महोत्सव का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ कलाकारों, शिल्पकारों और पारंपरिक कलाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है।




