धार्मिक: नवरात्र में मां शीतला के दरबार में भक्तों की भीड़, रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद

नवरात्र में मां शीतला के दरबार में भक्तों की भीड़, रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद

देहरादून। उत्तराखंड में नवरात्र के अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल स्थित मां शीतला देवी मंदिर में भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं।

वहीं, चमोली जिले में पंचकेदारों में शामिल चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शनिवार को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अब अगले छह महीनों तक श्रद्धालु भगवान रुद्रनाथ के दर्शन गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में कर सकेंगे।

मां शीतला देवी मंदिर में नवरात्र पर उमड़ी भीड़, आरोग्य की देवी के रूप में होती है पूजा

हरिद्वार को सिद्धपीठों की स्थली माना जाता है। यहां कनखल स्थित मां शीतला देवी का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। दक्षेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित इस सिद्धपीठ का संबंध राजा दक्ष प्रजापति और माता सती से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं से है।

मान्यता है कि मां शीतला राजा दक्ष प्रजापति की कुलदेवी थीं। उन्हें आरोग्य की देवी के साथ ही हरिद्वार की कुलदेवी के रूप में भी पूजा जाता है।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राकेश गिरी के मुताबिक, राजा दक्ष प्रजापति ने मां शीतला की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर माता सती का जन्म हुआ था। इन मान्यताओं के कारण मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है।

नवरात्र में मां को लगाया जाता है 56 भोग

मां शीतला देवी मंदिर में सामान्य दिनों में भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र, सावन और शीतला अष्टमी जैसे अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

नवरात्र के दौरान मंदिर में प्रतिदिन मां को 56 भोग लगाने की परंपरा है। भक्त मां को चुनरी, पुष्प और प्रसाद अर्पित करते हैं। पंचामृत से अभिषेक के साथ मां का विधि-विधान से श्रृंगार किया जाता है।

मुख्य पुजारी पंडित राकेश गिरी ने बताया कि मां शीतला की पूजा विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य और संतान की लंबी आयु की कामना के लिए की जाती है। नवरात्र के अवसर पर हरिद्वार के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

कनखल आने वाले श्रद्धालु मां शीतला देवी के दर्शन के साथ समीप स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भी पूजा-अर्चना करते हैं। गंगा तट के निकट स्थित इन धार्मिक स्थलों के कारण कनखल का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद
दूसरी ओर, चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शनिवार, 17 अक्टूबर को रात आठ बजे विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु कपाट बंद होने के पावन अवसर के साक्षी बने। भगवान रुद्रनाथ के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।

कपाट बंद होने से पहले मंदिर में भगवान रुद्रनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। पंडित आचार्य हरीश भट्ट ने भगवान का अभिषेक और श्रृंगार पूजा संपन्न कराई।

इस दौरान मंदिर में रुद्री पाठ का आयोजन भी किया गया। कपाट बंद होने के भावुक क्षणों में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

पौराणिक परंपराओं के अनुसार, भगवान रुद्रनाथ के मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। पंचकेदारों में शामिल इस धाम में हर साल गर्मियों और अनुकूल मौसम के दौरान श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सर्दियों में ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में छह महीने तक होंगे दर्शन

रुद्रनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भगवान की उत्सव डोली की शीतकालीन यात्रा शुरू होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 18 अक्टूबर को डोली ज्वाला मंदिर, देवलधार में रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को डोली गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी।

गोपीनाथ मंदिर भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन गद्दीस्थल है। यहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान की डोली को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद अगले छह महीनों तक श्रद्धालु गोपेश्वर में ही भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन की ओर से डोली यात्रा के मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां की गई हैं। शीतकालीन प्रवास के दौरान गोपेश्वर में श्रद्धालुओं को भगवान रुद्रनाथ के दर्शन का अवसर मिलेगा।

इस तरह, एक ओर हरिद्वार में मां शीतला देवी के मंदिर में नवरात्र की आस्था देखने को मिल रही है, तो दूसरी ओर चमोली में भगवान रुद्रनाथ के कपाट बंद होने के साथ शीतकालीन पूजा की परंपरा शुरू हो रही है। दोनों धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आस्था और उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक परंपराएं देखने को मिल रही हैं।