कांग्रेस में घमासान। हरदा की 9 यात्राएं स्थगित, सैलजा के कार्यक्रम में समर्थक भिड़े
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में चल रहा सियासी घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। एक ओर कांग्रेस हाईकमान की सख्ती के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अपनी प्रस्तावित 9 धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्राएं स्थगित करनी पड़ीं।
वहीं दूसरी ओर हरिद्वार में कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ यात्रा’ के दौरान नेताओं और समर्थकों के बीच मारपीट ने पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को उजागर कर दिया।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि उन्होंने 9 और धन्यवाद यात्राओं की तैयारी कर ली थी और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां भी सौंप दी गई थीं, लेकिन अब उन्हें कार्यक्रम स्थगित करने पड़ रहे हैं।
उन्होंने समर्थकों और आयोजकों से क्षमा मांगते हुए कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि पार्टी संगठन भी इसी तरह का जनसंवाद कार्यक्रम चलाए, जिससे वह जुड़ सकें।
दरअसल, हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि पार्टी से अलग समानांतर अभियान नहीं चलाए जा सकते और सभी कार्यक्रम संगठन के बैनर तले ही होने चाहिए।
बाद में कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तराखंड में कोई भी व्यक्तिगत अभियान पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी।
इसी बीच हरिद्वार पहुंचीं कुमारी सैलजा ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि कांग्रेस एक बड़ा संगठन है और कोई भी व्यक्ति पार्टी से बड़ा नहीं हो सकता।
उनके इस बयान को हरीश रावत विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। सैलजा ने कहा कि चाहे कोई भी नेता हो, संगठन और पार्टी हमेशा व्यक्ति से ऊपर होती है।
वहीं, हरिद्वार में कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ यात्रा’ की शुरुआत विवादों में घिर गई। यात्रा शुरू होने से पहले लालढांग के कांग्रेस नेता गुरजीत लहरी और मंगलौर के नेता जितेंद्र पंवार के समर्थकों के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई।
दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना ने कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और खेमेबाजी की चर्चाओं को और हवा दे दी।
यात्रा के दौरान कुमारी सैलजा, गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, करन माहरा और अन्य नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंगा तट पर लोकतंत्र बचाने और भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है और मतदाताओं के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
उधर, दिल्ली रवाना होने से पहले हरीश रावत ने कांग्रेस के साथ अपने करीब 60 साल पुराने रिश्ते का जिक्र करते हुए भावुक पोस्ट भी साझा किया।
उन्होंने कहा कि पहली बार उनके राजनीतिक जीवन में ऐसी स्थिति आई है जब पार्टी उनसे किसी मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांग सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद भी पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने के लिए उत्सुक हैं।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस में नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक सक्रियता को लेकर उठे इस विवाद ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठकों पर है, जहां हरीश रावत और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद इस पूरे विवाद की दिशा तय हो सकती है।



