जयकारों से गूंजा होमकुंड, कैलाश रवाना हुए तीन चौसिंगा खाड़ू। नैनीताल में विदाई शोभायात्रा
देहरादून। उत्तराखंड में मां नंदा देवी की आस्था और परंपरा से जुड़े दो प्रमुख धार्मिक आयोजन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गए हैं। चमोली की पवित्र पंचगंगा स्थित होमकुंड में नंदा देवी बड़ी जात यात्रा की मुख्य धार्मिक पूजा और अनुष्ठान संपन्न हो गए हैं।
विशेष पूजा के बाद यात्रा के साथ चल रहे तीन चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश के लिए विदाई दी गई। वहीं नैनीताल में ऐतिहासिक श्री नंदा देवी महोत्सव का बुधवार, 23 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा के डोला विसर्जन के साथ विधिवत समापन होगा।
चमोली में 16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र में स्नान और पूजा-अर्चना के बाद दशोली, बंड और ज्वाल्पा की नंदा देवी की देव डोलियां-छंतोलियां तथा पिछले 17 दिनों से यात्रा के साथ चल रहे तीन चौसिंगा खाड़ू होमकुंड के लिए रवाना हुए।
त्रिशूली और नंदा घुंघटी की पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में स्थित होमकुंड पहुंचते ही पूरा क्षेत्र नंदा देवी के जयकारों से गूंज उठा।
होमकुंड में नंदा-भगवती की विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। पुजारी और पंडित मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़ और प्रवीण गौड़ सहित अन्य पुजारियों ने विधि-विधान पूरा कराया।
इस दौरान बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला, आयोजन समिति और मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
पूजा-अनुष्ठान के दौरान कई नंदा भक्तों पर देवी-देवताओं का अवतरण हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे मां नंदा का आशीर्वाद मानते हुए दर्शन किए। इसके बाद यात्रा की सबसे भावुक रस्मों में शामिल चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई हुई।
तीनों चौसिंगा खाड़ुओं को सजाया गया और उनकी पीठ पर नंदा देवी को अर्पित किए जाने वाले पवाड़े के रूप में खाजा, कलैऊ, प्रसादी, फल-फूल, आभूषण और श्रृंगार सामग्री रखी गई।
मंत्रोच्चार और मां नंदा देवी के जयकारों के बीच खाड़ुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। इस दौरान कई श्रद्धालु भावुक हो गए। खाड़ुओं की कैलाश विदाई के साथ ही होमकुंड में बड़ी जात की मुख्य पूजा संपन्न हुई और यात्रा ने वापसी का मार्ग पकड़ लिया।
होमकुंड से लौटने के बाद यात्रा 17वें और चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंची, जहां रात्रि प्रवास और देवी जागरण हुआ। इसके बाद देव डोलियां-छंतोलियां 18वें आबादी वाले पड़ाव सुतोल गांव के लिए रवाना हुईं।
घने जंगलों से गुजरते हुए यात्रा तातड़ पहुंची, जहां ध्योंसिंह देवता की पूजा-अर्चना के बाद यात्रियों ने विश्राम किया। इसके बाद सुतोल में ग्रामीणों ने देव डोलियों और श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
करीब 280 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बना हुआ है। बड़ी पूजा और चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई के बाद बड़ी संख्या में यात्री अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं।
यात्रा अब आबादी वाले क्षेत्रों से होते हुए सिद्धपीठ कुरूड़ की ओर बढ़ रही है। 23 सितंबर को दशोली और बंड की देव डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेंगी, जहां यज्ञ-अनुष्ठान और धार्मिक विधि-विधान के साथ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का औपचारिक समापन किया जाएगा।
इधर, देवराड़ा-थराली की वापसी यात्रा भी अपने निर्धारित पड़ावों से आगे बढ़ रही है। दूसरे पड़ाव ल्वाणी से कांडे और बमणबेरा होते हुए देवी डोली तीसरे पड़ाव उलंग्रा पहुंची, जहां ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के साथ डोली का स्वागत किया और देवी जागरण किया।
इसके बाद डोली हाट कल्याणी, इच्छोली और अठ्ठू गांव होते हुए चौथे पड़ाव बेराधार पहुंची। आगे यात्रा सिरमथल होते हुए थराली ब्लॉक के टुंड्री और गोठिंड़ा गांव पहुंचेगी और निर्धारित पड़ावों से होते हुए सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी।
नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा की विदाई
नैनीताल में ऐतिहासिक श्री नंदा देवी महोत्सव भी अपने अंतिम पड़ाव पर है। बुधवार, 23 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा का भव्य डोला नगर भ्रमण पर निकलेगा। शोभायात्रा के बाद धार्मिक विधि-विधान के साथ डोला विसर्जन किया जाएगा। इसके साथ ही महोत्सव का विधिवत समापन होगा।
मां नंदा-सुनंदा की अंतिम विदाई के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के नैनीताल पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने यातायात व्यवस्था के लिए विशेष डायवर्जन प्लान लागू किया है।
भवाली बाजार क्षेत्र में भारी एवं यात्री वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। रामगढ़ और घोड़ाखाल की ओर से आने वाले वाहनों को आवश्यकता के अनुसार श्यामखेत से घोड़ाखाल मंदिर, घोड़ाखाल तिराहा और नैनी बैंड प्रथम की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
खैरना-कैंची की ओर से आने वाले वाहनों को शिप्रा पुल भवाली से सैनिटोरियम बाईपास की ओर भेजा जाएगा।
ज्योलीकोट और नैनीताल की ओर से अल्मोड़ा या रानीखेत जाने वाले वाहनों को नैनी बैंड द्वितीय से सैनिटोरियम बाईपास होते हुए शिप्रा पुल भवाली की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
वहीं भीमताल की ओर से आने वाले वाहनों को जरूरत के अनुसार नैनी बैंड प्रथम से सैनिटोरियम बाईपास होते हुए शिप्रा पुल भवाली की ओर भेजा जाएगा।
पुलिस ने वाहन चालकों से सड़क किनारे वाहन पार्क नहीं करने की अपील की है। भवाली में नगरपालिका मैदान और रोडवेज पार्किंग सहित निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। भीड़ बढ़ने पर यातायात को कुछ समय के लिए रोका या चरणबद्ध तरीके से डायवर्ट किया जा सकता है।
एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन, पुलिस, आपदा राहत एवं बचाव दल तथा आवश्यक खाद्य सामग्री और दूध जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए निर्बाध कॉरिडोर उपलब्ध रखा जाएगा।
नैनीताल, भवाली और भीमताल में स्कूल-कॉलेज बंद
मां नंदा-सुनंदा के डोला विसर्जन को देखते हुए 23 सितंबर को नैनीताल, भवाली और भीमताल नगर क्षेत्रों में सभी सरकारी, अशासकीय और निजी विद्यालयों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों और विश्वविद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के अनुसार श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संभावित भीड़ तथा यातायात व्यवस्था को देखते हुए छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए यह निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने किए मां नंदा-सुनंदा के दर्शन
इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल पहुंचकर मां नंदा-सुनंदा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने मां की आरती में भी हिस्सा लिया और प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नंदा देवी महोत्सव उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का जीवंत उत्सव है।
उन्होंने लोकगीत, झोड़ा-चांचरी और ढोल-दमाऊं जैसी परंपराओं को प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि सरकार विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने मानसखंड मंदिर माला मिशन के जरिए कुमाऊं के धार्मिक स्थलों को सुविधाओं से जोड़ने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन से स्थानीय युवाओं के रोजगार, महिलाओं के स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों के बाजार को विस्तार के अवसर मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य में अब तक 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिलने, लंबे समय से लंबित परियोजनाओं के आगे बढ़ने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नंदा देवी के दर्शन के लिए पहुंचने वाला हर व्यक्ति मां के बुलावे पर यहां आता है। उन्होंने मां नंदा-सुनंदा से प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की।
अब चमोली में बड़ी जात यात्रा अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है, जबकि नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा की भव्य विदाई की तैयारी पूरी हो चुकी है।
23 सितंबर को कुरूड़ में यज्ञ-अनुष्ठान के साथ बड़ी जात यात्रा और नैनीताल में डोला विसर्जन के साथ नंदा देवी महोत्सव अपने-अपने धार्मिक चरणों का समापन करेगा।


