देशभर के न्यायाधीशों के लिए अलग वेतन आयोग बनाने की मांग, SC ने जारी किया नोटिस
नई दिल्ली। महाराष्ट्र स्टेट जजेज एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर कर देशभर के न्यायाधीशों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन (NJPC) के गठन की मांग की है।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को होगी।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट और देशभर की जिला एवं अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीशों के वेतन, भत्तों, पेंशन, रिटायरमेंट लाभ और अन्य सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक वेतन आयोग बनाया जाए।
एसोसिएशन का तर्क है कि न्यायपालिका की सेवा शर्तों का निर्धारण सामान्य वेतन आयोगों के बजाय एक अलग और स्वतंत्र व्यवस्था के माध्यम से होना चाहिए।
8वें वेतन आयोग के दायरे में न्यायिक अधिकारियों को शामिल करने पर आपत्ति
याचिका में केंद्र सरकार के 3 नवंबर 2025 के उस प्रस्ताव को चुनौती दी गई है, जिसके तहत केंद्र शासित प्रदेशों के अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के दायरे में लाया गया है।
एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 1993 और 2001 के ऐतिहासिक फैसलों तथा ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामलों में दिए गए निर्देशों के विपरीत है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि न्यायपालिका की तुलना कार्यपालिका से नहीं की जा सकती और न्यायिक अधिकारियों के लिए अलग वेतन संरचना होनी चाहिए। इसी सिद्धांत के आधार पर पहले शेट्टी आयोग सहित विशेष न्यायिक वेतन आयोगों का गठन किया गया था।
हर 10 साल में बने नया न्यायिक वेतन आयोग
याचिका में मांग की गई है कि NJPC के गठन के बाद वह 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपे। रिपोर्ट मिलने के तीन महीने के भीतर केंद्र और राज्य सरकारों को उसकी सिफारिशें लागू करने का निर्देश दिया जाए।
साथ ही न्यायाधीशों के वेतन और सेवा शर्तों की नियमित समीक्षा के लिए हर 10 वर्ष में नया NJPC गठित करने की व्यवस्था बनाई जाए।
एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि न्यायाधीशों के वेतन में महंगाई भत्ते (DA) के अनुरूप समय-समय पर संशोधन किया जाए और पूरे देश में न्यायिक अधिकारियों के वेतनमान में एकरूपता सुनिश्चित की जाए।
अंतरिम राहत की भी मांग
याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर मांग की गई है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के लागू होने के साथ ही 1 जनवरी 2026 से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के वेतन में भी संशोधन किया जाए।
इसके अलावा आवास, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा, परिवहन, पेंशन, ग्रेच्युटी, रिटायरमेंट के बाद के लाभ, न्यायिक रिक्तियों और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को न्यायपालिका की ओर आकर्षित करने जैसे मुद्दों पर भी NJPC से व्यापक सिफारिशें देने की मांग की गई है।


