मूसलाधार बारिश से बढ़ी मुश्किलें! सड़कें प्रभावित, पुश्ता ध्वस्त और गड्ढों में धान
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से पहाड़ से लेकर मैदान तक मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कहीं सड़कें बंद होने से यातायात प्रभावित है तो कहीं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
टिहरी में निर्माणाधीन रिंग रोड का पुश्ता बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि हल्द्वानी में बदहाल सड़कों के खिलाफ कांग्रेस ने पानी से भरे गड्ढों में धान के पौधे लगाकर अनोखा प्रदर्शन किया। वहीं, पिथौरागढ़ में बारिश के कारण बाधित सड़कों को खोलने का काम जारी है।
पिथौरागढ़ में सड़क खोलने की जद्दोजहद: बारिश के बाद जिले में कई स्थानों पर सड़कें प्रभावित हुई हैं। बंद मार्गों को खोलने के लिए मशीनरी और कर्मचारियों को मौके पर लगाया गया है। सड़क खोलने के प्रयास लगातार जारी हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में यातायात को जल्द सामान्य किया जा सके।
टिहरी में पहली बारिश में निर्माणाधीन पुश्ता क्षतिग्रस्त
टिहरी जनपद के जाख–डोबरा रिंग रोड के तहत बनाया गया निर्माणाधीन पुश्ता लगातार बारिश के बीच क्षतिग्रस्त हो गया।
पुश्ते का एक हिस्सा टूटने और धंसने के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया होता तो पहली ही बारिश में पुश्ते की ऐसी स्थिति नहीं बनती।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और निर्माणदायी संस्था से पुश्ते की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षतिग्रस्त हिस्से की महज मरम्मत करने के बजाय मानकों के अनुरूप मजबूत तरीके से दोबारा निर्माण कराया जाना चाहिए, क्योंकि यह रिंग रोड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है।
हल्द्वानी में गड्ढों में धान रोपकर कांग्रेस का प्रदर्शन
नैनीताल जिले के हल्द्वानी में बदहाल सड़कों के खिलाफ कांग्रेस ने अनोखे अंदाज में विरोध जताया। दमुवाढूंगा क्षेत्र में कांग्रेस नेता ललित जोशी के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने बारिश के पानी से लबालब सड़क के गड्ढों में धान के पौधे रोपे।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शहर की कई सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हैं, जिनमें बारिश का पानी भरने से वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को परेशानी हो रही है। कांग्रेस ने प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़कों का निरीक्षण कर गड्ढों को तत्काल भरने और स्थायी समाधान की मांग की।
गोमुख-केदारताल में दिखीं छोटी झीलें, वैज्ञानिकों ने बताया फिलहाल खतरा नहीं
दूसरी ओर, गोमुख और केदारताल क्षेत्र में छोटी सुप्राग्लेशियल झीलें दिखाई देने के बाद इन्हें लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिकों के मुताबिक इन झीलों का आकार अपेक्षाकृत छोटा है और इनमें पानी का वॉल्यूम भी कम है। मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर इनसे बड़े पैमाने पर बाढ़ या GLOF जैसी आपदा का तत्काल खतरा नहीं है।
वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसी अधिकांश झीलें अस्थायी प्रकृति की होती हैं और मौसम, जल निकासी या ग्लेशियर की सतह में बदलाव के साथ इनका आकार घट-बढ़ सकता है।
हालांकि, हिमालय में बदलते मौसम और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों को देखते हुए इन क्षेत्रों की नियमित वैज्ञानिक निगरानी बेहद जरूरी है।


