पड़ताल: फर्जीवाड़े से अवैध शिकार तक, उत्तराखंड में तीन मामलों ने खोली सरकारी निगरानी व्यवस्था की पोल

फर्जीवाड़े से अवैध शिकार तक, उत्तराखंड में तीन मामलों ने खोली सरकारी निगरानी व्यवस्था की पोल

देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड की पारदर्शिता को लेकर तीन अलग-अलग मामलों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बागेश्वर में प्राथमिक शिक्षकों के फर्जी UTET प्रमाणपत्रों का मामला लगातार बढ़ रहा है।

वहीं देहरादून नगर निगम के संपत्ति रिकॉर्ड में बिना दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रिया के नाम दर्ज किए जाने का खुलासा हुआ है। दूसरी ओर नैनीताल की नैनीझील में पर्यावरणीय संतुलन के लिए डाली गई मछलियों का रात के अंधेरे में अवैध शिकार किए जाने का मामला सामने आया है।

बागेश्वर में नौ शिक्षकों के UTET प्रमाणपत्र कूटरचित
प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए लगाए गए UTET प्रमाणपत्रों की जांच में बागेश्वर जिले में अब तक नौ प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए हैं।

ताजा जांच में चार और शिक्षकों के प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी सामने आई है। इनमें बागेश्वर विकासखंड के दो और कपकोट के दो शिक्षक शामिल हैं। इससे पहले कपकोट में पांच शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जा चुके हैं।

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर ने मूल अभिलेखों से मिलान के बाद प्रमाणपत्रों में अंक और अन्य विवरणों में हेरफेर की पुष्टि की। कुछ मामलों में प्रमाणपत्रों पर दर्ज अनुक्रमांक तक परिषद के रिकॉर्ड में नहीं मिले।

बागेश्वर के पंकज कुमार के UTET प्रथम-2024 प्रमाणपत्र का अनुक्रमांक परिषद की मूल सारणियन पंजिका में मौजूद नहीं मिला। वहीं नेहा के प्रमाणपत्र में दर्ज अंक मूल रिकॉर्ड से अलग पाए गए।

कपकोट के चंद्रप्रकाश आर्य के मूल रिकॉर्ड में कुल 61/150 अंक दर्ज थे, जबकि प्रस्तुत अंकपत्र में अलग अंक थे। प्रियंका के प्रमाणपत्र का सत्यापन भी मूल अभिलेखों से नहीं हो सका।

जिला शिक्षा अधिकारी आसाराम चौधरी के अनुसार सभी संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।

नगर निगम के ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम, लेकिन दस्तावेज गायब

देहरादून नगर निगम की संपत्ति रिकॉर्ड व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक संपत्ति के ऑनलाइन रिकॉर्ड में विनोद कुमार अग्रवाल और प्रदीप कुमार अग्रवाल के नाम दर्ज पाए गए, लेकिन इन नामों को दर्ज करने से संबंधित कोई दस्तावेज निगम के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिला।

उत्तराखंड सूचना आयोग में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम ने स्वीकार किया कि नामांतरण की कोई विधिवत प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और संबंधित व्यक्तियों को कोई नामांतरण नोटिस भी जारी नहीं किया गया था।

शिकायत के बाद 20 जनवरी 2026 को दोनों से संपत्ति स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, लेकिन निगम के अनुसार दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। संपत्ति के स्वामित्व को लेकर मामला देहरादून की अदालत में भी लंबित है।

नगर निगम ने बताया कि वर्ष 2020-21 में तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बिना दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रिया के सॉफ्टवेयर में नाम बदल दिए थे। बाद में संबंधित आउटसोर्स कर्मचारी को हटा दिया गया।

मामले में RTI आदेशों के अनुपालन में लापरवाही पर सूचना आयोग ने तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी गौरव भसीन और वर्तमान लोक सूचना अधिकारी विनय प्रताप सिंह पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

नैनीझील में मछलियों का अवैध शिकार, युवाओं ने पकड़े आरोपी

नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनीझील में पर्यावरणीय संतुलन सुधारने के लिए डाली गई गोल्डन महाशीर, ग्रास कार्प और अन्य मछलियों के अवैध शिकार का मामला भी सामने आया है।

वर्ष 2008 में झील के कमजोर पड़ते पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने के लिए एरिएशन प्रोजेक्ट के साथ मत्स्य विभाग की ओर से करीब डेढ़ लाख मछलियों के बीज डाले गए थे।

इनका उद्देश्य झील में मौजूद अवांछित काई, पौधों और जलीय जीवों को नियंत्रित कर झील की स्वच्छता और पारिस्थितिकी को बेहतर बनाए रखना था।

मंगलवार रात मल्लीताल बोट क्लब स्थित बोट स्टैंड के पास कुछ स्थानीय युवाओं ने दो लोगों को झील से मछलियां पकड़ते देखा। युवाओं ने घटना का वीडियो बनाया और दोनों को पकड़कर मछलियां वापस झील में डलवाईं।

पहले नैनीझील में एंगलिंग और फिशिंग की अनुमति थी, लेकिन समय के साथ इसे बंद कर दिया गया। इसके बावजूद अब अवैध रूप से मछली पकड़ने की घटनाएं सामने आ रही हैं। मछली के अवैध शिकार पर रोक लगाने की जिम्मेदारी नगर पालिका और पुलिस की है।

तीनों घटनाएं अलग, लेकिन सवाल एक- व्यवस्था की निगरानी कितनी मजबूत?

फर्जी UTET प्रमाणपत्रों से लेकर संपत्ति रिकॉर्ड में बिना दस्तावेज नाम दर्ज होने और संरक्षित नैनीझील में मछलियों के अवैध शिकार तक, तीनों मामले सरकारी व्यवस्थाओं की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हैं।

एक ओर फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश सामने आ रही है, तो दूसरी ओर संपत्ति रिकॉर्ड में प्रक्रिया की अनदेखी और झील में प्रतिबंध के बावजूद मछली पकड़ने की घटनाएं सिस्टम की निगरानी पर सवाल उठा रही हैं।