बिग ब्रेकिंग: लोकायुक्त नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 4 हफ्ते की मोहलत। 2013 से खाली है पद

लोकायुक्त नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 4 हफ्ते की मोहलत। 2013 से खाली है पद

नैनीताल। उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी की ओर से वर्ष 2021 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर बताया कि लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया गतिमान है।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि लोकायुक्त और उसके सदस्यों के लिए पैनल तैयार किया जा रहा है, जिसे खोजबीन समिति के समक्ष रखा जाएगा।

सरकार ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह की मोहलत देते हुए अगली सुनवाई तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

2013 से खाली है लोकायुक्त का पद

याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि उत्तराखंड में लोकायुक्त का पद वर्ष 2013 से खाली पड़ा है। इसके बावजूद लोकायुक्त संस्थान के नाम पर हर साल करीब 2 से 3 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

याचिका में कर्नाटक और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि वहां लोकायुक्त संस्थान भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर रहा है, जबकि उत्तराखंड में लगातार घोटाले और अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि छोटे-छोटे मामलों को भी न्याय के लिए हाईकोर्ट तक लाना पड़ रहा है। ऐसे में राज्य में एक स्वतंत्र और प्रभावी भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था की जरूरत है।

जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर भी उठाए सवाल

जनहित याचिका में राज्य की मौजूदा जांच व्यवस्था की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक राज्य की अधिकांश जांच एजेंसियां शासन के अधीन हैं और उनका नियंत्रण राजनीतिक नेतृत्व के हाथों में रहता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में ऐसी कोई स्वतंत्र जांच एजेंसी नहीं है, जिसके पास शासन की पूर्व अनुमति के बिना राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने का अधिकार हो। विजिलेंस विभाग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि यह भी राज्य पुलिस का हिस्सा है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि लोकायुक्त की नियुक्ति जल्द की जाए, ताकि राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

न्यायालयों का बोझ कम होने की उम्मीद

याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि यदि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की प्रभावी सुनवाई लोकायुक्त संस्थान के माध्यम से होती है, तो इससे हाईकोर्ट और अन्य न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सकता है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया में हुई प्रगति की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।