हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ पर घमासान, कांग्रेस बोली- सामाजिक न्याय की लड़ाई, भाजपा ने कहा- राजनीति
हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड की सियासत में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस में तहरीर, एफआईआर, मौन प्रदर्शन, थाने और एसएसपी कार्यालय के घेराव से लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारियों तक पहुंच गया है।
कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जोड़कर सरकार पर हमलावर है, जबकि भाजपा कांग्रेस पर जातीय भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगा रही है।
कांग्रेस ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर दी तहरीर
सोमवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे। कांग्रेस ने कथित शुद्धिकरण की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 8 अगस्त को खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर मंच का शुद्धिकरण किया गया था।
यशपाल आर्य ने पुलिस और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस की शिकायत पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जबकि राहुल गांधी के खिलाफ बयान को आधार बनाकर कुछ ही समय में मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
कांग्रेस नेता ने इसे राजनीतिक भेदभाव करार देते हुए कहा कि कानून की नजर में सभी के लिए समान व्यवस्था होनी चाहिए। उनका आरोप है कि एक राष्ट्रीय नेता के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और कांग्रेस की शिकायत पर कथित रूप से चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
बारिश में कांग्रेस का मौन प्रदर्शन
इससे पहले रविवार शाम कांग्रेस ने रामलीला मैदान में मौन प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने बिना नारेबाजी किए मौन रहकर कथित शुद्धिकरण की घटना के खिलाफ विरोध जताया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि रामलीला मैदान किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाला स्थान है। ऐसे में किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद सार्वजनिक मंच के कथित शुद्धिकरण की घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मौन प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, नारायण पाल, रंजीत रावत, पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, पूर्व सांसद महेंद्र पाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव संजीव आर्य, कांग्रेस नेता ललित जोशी समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राहुल गांधी के बयान के बाद और गरमाई सियासत
रामलीला मैदान का विवाद स्थानीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान हल्द्वानी की घटना का जिक्र करते हुए इसे दलित सम्मान से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी ने जिस घटना पर सवाल उठाए, उस पर कार्रवाई करने के बजाय उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को उसके तार्किक अंजाम तक ले जाएगी। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री आवास और राजभवन के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनके लिए यह केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और दलित अस्मिता से जुड़ा विषय है।
‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’—कांग्रेस
एआईसीसी पदाधिकारी जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कार्रवाई ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ जैसी स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने नेताओं के कथित जातिवादी व्यवहार का बचाव करने की कोशिश कर रही है।
जितेंद्र सिंह के मुताबिक, कांग्रेस इस मामले को संविधान में निहित सामाजिक न्याय के मूल्यों से जोड़कर देख रही है। उन्होंने कहा कि जब तक खड़गे के कथित अपमान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, कांग्रेस अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना को 20 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रदेशभर में पुलिस को तहरीर देने की तैयारी
हल्द्वानी से शुरू हुआ कांग्रेस का विरोध अब प्रदेश के कई हिस्सों तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेताओं ने नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी समेत कई जिलों में पुलिस को तहरीर देकर कथित शुद्धिकरण में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
देहरादून में कांग्रेस के एससी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल डीजीपी कार्यालय के बाहर उपवास पर बैठे। कांग्रेस की ओर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के खिलाफ भी तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई है।
कांग्रेस ने 7 सितंबर को देहरादून में बड़ा प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी के अनुसार प्रदर्शन में उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा समेत वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।
भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया ‘जातिवाद का कार्ड’ खेलने का आरोप
कांग्रेस के आरोपों के बीच भाजपा ने भी मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड सरकार में राज्य स्तरीय जलागम परिषद के उपाध्यक्ष एवं दर्जा राज्य मंत्री शंकर कोरंगा ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
कोरंगा ने कहा कि कांग्रेस के पास जनता के बीच उठाने के लिए मुद्दों की कमी हो गई है, इसलिए वह जाति, धर्म और वर्ग के नाम पर राजनीति करने का प्रयास कर रही है।
उनका दावा है कि रामलीला मैदान में कुछ दलित समाज के लोगों द्वारा किए गए स्वच्छता एवं साफ-सफाई अभियान को कांग्रेस जानबूझकर अलग रंग देने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक विवाद बनाने के पीछे उसका उद्देश्य क्या है। कोरंगा ने कहा कि समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने के बजाय राजनीतिक दलों को विकास और जनहित के मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
भूपालराम टम्टा बोले- चुनाव नजदीक आते ही मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही कांग्रेस
थराली से भाजपा विधायक भूपालराम टम्टा ने भी सोमवार को प्रेसवार्ता कर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस इस मामले को जातीय रंग देकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
टम्टा ने कहा कि भाजपा का मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा किसी व्यक्ति के साथ जाति के आधार पर भेदभाव की पक्षधर नहीं है और केंद्र तथा राज्य सरकार सभी वर्गों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं।
भाजपा विधायक ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा कि विपक्ष को जातीय भावनाओं को भड़काने के बजाय विकास और जनहित के मुद्दों पर जनता के बीच जाना चाहिए।
सीताराम केसरी और आंबेडकर के बहाने कांग्रेस पर हमला
शंकर कोरंगा ने कांग्रेस के दलित सम्मान के दावे पर सवाल उठाते हुए पार्टी के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और दलित नेता स्वर्गीय सीताराम केसरी के साथ पार्टी में हुए व्यवहार का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कांग्रेस से अपने पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड पर जवाब देने की मांग की। साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारत रत्न दिए जाने में हुई देरी को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल खड़े किए।
कोरंगा ने यह भी पूछा कि चुनावों के दौरान कांग्रेस गरीब, वंचित और जमीन से जुड़े दलित वर्ग के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के पर्याप्त अवसर क्यों नहीं देती।
‘क्या राहुल गांधी हल्द्वानी आएंगे?’
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस के सामने अब आंदोलन को आगे बढ़ाने की चुनौती है। जब नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से पूछा गया कि क्या राहुल गांधी खुद हल्द्वानी आ सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लिए हजारों कार्यकर्ता खड़े हैं और जब तक न्याय नहीं मिलता, कांग्रेस की लड़ाई जारी रहेगी।
अब पुलिस कार्रवाई पर टिकी नजर
हल्द्वानी का यह विवाद अब कई स्तरों पर पहुंच चुका है। एक तरफ कांग्रेस कथित शुद्धिकरण को दलित सम्मान और सामाजिक न्याय का प्रश्न बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बता रही है।
कांग्रेस की ओर से लगातार तहरीर और प्रदर्शन किए जाने के बाद अब निगाहें पुलिस-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं।
यदि कांग्रेस की शिकायत पर मुकदमा दर्ज होता है या जांच आगे बढ़ती है, तो मामले की दिशा बदल सकती है। वहीं यदि कार्रवाई में देरी जारी रहती है तो कांग्रेस के प्रदेशव्यापी आंदोलन के और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद उत्तराखंड की राजनीति में दलित सम्मान, सामाजिक न्याय, जातीय राजनीति और राजनीतिक जवाबदेही के सवालों को एक साथ सामने ला चुका है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा कितना बड़ा राजनीतिक रूप लेता है, यह पुलिस जांच और दोनों दलों की अगली रणनीति पर निर्भर करेगा।


