राजनीति: वंदे मातरम् से वन नेशन-वन इलेक्शन तक गरमाई सियासत, रामदेव के बयान से चर्चा कंगना-बृजभूषण विवाद

वंदे मातरम् से वन नेशन-वन इलेक्शन तक गरमाई सियासत, रामदेव के बयान से चर्चा कंगना-बृजभूषण विवाद

देहरादून। धर्मनगरी हरिद्वार रविवार को संत समागम के बहाने राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मंच बन गई। ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर आयोजित संत समागम में योगगुरु स्वामी रामदेव ने एक ओर एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था का समर्थन किया, वहीं वंदे मातरम् विवाद पर भी अपनी राय रखी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने के आरोप लगाए।

दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा पर वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक लाभ लेने और समाज को बांटने का आरोप लगाया। इसी बीच कंगना रनौत और बृजभूषण शरण सिंह के साथ चल रही जुबानी जंग पर भी रामदेव ने तल्ख प्रतिक्रिया दी।

स्वामी रामदेव ने कहा कि वह ओछे लोगों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देकर विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव कौन हैं, उनका योगदान क्या है और उन्होंने देश के लिए क्या किया है, यह पूरा देश जानता है।

हाल के दिनों में भाजपा सांसद कंगना रनौत और बृजभूषण शरण सिंह के साथ रामदेव के बयानों को लेकर जुबानी टकराव सामने आया था। कंगना के एक बयान पर रामदेव की प्रतिक्रिया के बाद अभिनेत्री ने भी पलटवार किया था, जबकि बृजभूषण शरण सिंह के साथ भी रामदेव के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बयानबाजी को लेकर विवाद बना हुआ है।

रामदेव ने कहा कि आजकल संन्यासियों को गाली देना और समाज में भेदभाव की दीवारें खड़ी करना नया फैशन बन गया है। उन्होंने कहा कि किसान हो, युवा हो, ब्राह्मण हो, दलित हो या समाज का कोई भी वर्ग, किसी के साथ अन्याय होने पर उसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए।

रामदेव ने कहा कि किसी भी समुदाय या व्यक्ति को अपमानित करना संविधान और लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। संत समागम में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का समर्थन करते हुए रामदेव ने कहा कि देश में सालभर कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं, जिसका असर विकास कार्यों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।

उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में शिक्षक चुनावी ड्यूटी में लगाए जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उनका कहना था कि यदि देश में एक साथ चुनाव होंगे तो प्रशासनिक और शैक्षणिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक स्वार्थ के कारण इस व्यवस्था का विरोध करने का आरोप भी लगाया और कहा कि देशहित को राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर रखना होगा।

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् भारत माता की वंदना का गीत है और सवाल किया कि भारत माता की वंदना से आखिर किसे आपत्ति हो सकती है।

शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् के हिस्सों को लेकर निर्णय किए थे और आज भी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि देश को बांटने की किसी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कांग्रेस पर वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और आजादी की लड़ाई का प्रतीक रहा है।

धामी ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां मां गंगा से लेकर देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति के कारण वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों पर विवाद खड़ा कर रही है।

वंदे मातरम् विवाद पर रामदेव ने अलग अंदाज में कहा कि भारत माता ही लक्ष्मी और दुर्गा का स्वरूप हैं और जो लोग वंदे मातरम् को लेकर देवी-देवताओं और मंदिरों के संदर्भ में गलत अर्थ निकाल रहे हैं, उन्हें इसके भाव और संस्कृत की समझ विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मां की उपासना को संकीर्ण दायरे में नहीं देखा जाना चाहिए और वंदे मातरम् के अर्थ को गलत तरीके से पेश करना उचित नहीं है।

उधर देहरादून में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् से कांग्रेस का ऐतिहासिक संबंध रहा है और भाजपा आज इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन की मूल विचारधारा, मूल्यों और उस दौर में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों से अलग नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति के स्तर पर वंदे मातरम् को लेकर विचार-विमर्श हुआ था और उस दौर के शीर्ष स्वतंत्रता सेनानियों की भागीदारी तथा मार्गदर्शन में जो निर्णय लिए गए, कांग्रेस आज भी उसी ऐतिहासिक परंपरा का पालन करती है।

हरीश रावत ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी का वंदे मातरम् की ऐतिहासिकता से कोई संबंध नहीं रहा, लेकिन अब वह इस मुद्दे पर राजनीतिक ‘डकैती’ करने की कोशिश कर रही है।

इस तरह हरिद्वार का संत समागम केवल ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वंदे मातरम् विवाद और राष्ट्रीय राजनीति का नया अखाड़ा बन गया। एक ओर भाजपा नेताओं और संतों ने एक साथ चुनाव तथा वंदे मातरम् के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक और वैचारिक लाइन स्पष्ट की।

वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर इतिहास और राष्ट्रीय भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। आने वाले दिनों में वंदे मातरम् से जुड़ा यह सियासी संग्राम और तेज होने के संकेत हैं।